नईदिल्ली 7, नवंबर । बिहार विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का बयान राजनीतिक हलकों में बवंडर मचा रहा है। बिहार के रेगा में चुनावी रैली के दौरान प्रियंका गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और दो अन्य अधिकारियों, एस.एस. संधू व विवेक जोशी को खुली चेतावनी दी। उन्होंने मंच से कहा, “ज्ञानेश कुमार, अगर आप सोचते हैं कि आप शांति से रिटायर हो जाएंगे, तो ऐसा नहीं होगा। मैं जनता से कहती हूँ, इन तीनों के नाम कभी मत भूलना।”
प्रियंका गांधी का यह बयान हरियाणा विधानसभा चुनावों में कथित मतदान अनियमितताओं और वोटों से छेड़छाड़ के आरोपों से जुड़ा बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “जनता को धोखा देने की कोशिश करने वालों को चैन से नहीं सोने दिया जाएगा।” उनके बयान के बाद मंच से समर्थकों ने “चोर-चोर” के नारे लगाए, जिससे माहौल और गर्म हो गया।
इससे पहले राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनावों में लगभग 25 लाख फर्जी वोटों का इस्तेमाल हुआ और कांग्रेस समर्थकों के वोट जानबूझकर कम किए गए। राहुल ने इसे “100% सच” बताया था।
प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बताया और कहा कि कांग्रेस चुनाव हार की आशंका में संवैधानिक अधिकारियों को धमका रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों को और गहराता है।
बिहार में फिलहाल दो चरणों में मतदान हो रहा है। पहले चरण में 121 सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं, जबकि दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। इस बार मुकाबला भाजपा के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बीच कड़ा माना जा रहा है।
प्रियंका गांधी का यह बयान न केवल बिहार चुनाव में हलचल मचा रहा है, बल्कि चुनाव आयोग की भूमिका और राजनीतिक भाषणों की मर्यादा पर भी देशभर में नई बहस छेड़ गया है।
स्त्रोत: प्रभा साक्षी
