अजमेर| नगर निगम,अजमेर उपायुक्त महोदय द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के नाम पर “यूजर चार्ज” वसूली की सार्वजनिक सूचना जारी की गई । सूचना जारी होते ही शहर की जनता ने निगम पर ही सवालों का अंबार लगा दिया।

अजमेर की जनता और कानूनी जानकार निगम के आलाअधिकारियों से अब पूछ रहे हैं कि जो नगर निगम वर्षों से कई महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायिक और पर्यावरणीय आदेशों की पूर्ण अनुपालना नहीं कर पाया, वही निगम शुल्क वसूली के मामले में इतनी सक्रियता आखिर कहां से ले आया? शहर में चर्चा है कि अजमेर में कई योजनाएं कागजों में चमकती जरूर हैं, लेकिन जमीन पर हालात अक्सर उलट दिखाई देते हैं।
नगर निगम, अजमेर ,वर्षों से सफाई, प्रदूषण नियंत्रण और संरक्षण के दावे करता आ रहा है । समय-समय पर अदालतों और प्रशासनिक बैठकों में झील को बचाने के बड़े-बड़े वादे भी हुए, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि आज भी गंदे नालों का पानी झील के अंदर जा रहा , सफाई व्यवस्था और संरक्षण कार्यों को लेकर सवाल खत्म नहीं हुए। शहर में अब व्यंग के साथ यह चर्चा भी होने लगी है कि “आनासागर पूरी तरह साफ हुआ या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन जनता की जेब साफ करने की तैयारी जरूर पूरी दिखाई दे रही है।”
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों के द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर समय-समय पर सख्त निर्देश दिए , मगर शहर के कई हिस्सों में आज भी कचरे के ढेर, अनियमित सफाई व्यवस्था और वैज्ञानिक निस्तारण की कमी देखी जा सकती है। कई वार्डों के लोग आरोप लगा रहे हैं कि नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण तक सुनिश्चित नहीं है। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मूल व्यवस्था ही पूरी तरह व्यवस्थित नहीं है तो “यूजर चार्ज” आखिर किस उपलब्धि का लिया जाएगा?
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सेवन वंडर और सागर विहार पाथवे की लाइटें,सफाई, कैमरों का क्षतिग्रस्त होना खुल्ले आम दिखा रहा है कि निगम किस प्रकार संवेदक को आंख बंद कर भुगतान कर रहा वहीं आनासागर पाथवे जैसी परियोजनाओं को लेकर भी समय-समय पर रखरखाव और व्यवस्थाओं पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनता के करोड़ों रुपयों से बनी परियोजना धराशाही हो गई, जवाबदेही किसी की तय नहीं हुई , लेकिन जनता से शुल्क लेने के मामले में निगम की कार्यशैली अचानक अत्यंत चुस्त दिखाई देने लगी ।
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत के आदेश/निर्देशों का अर्थ केवल “यूजर चार्ज” वसूलना नहीं है। अदालत ने वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली पर भी समान रूप से जोर दिया है। विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या नगर निगम ने वार्डवार सेवा गारंटी जारी की? क्या शिकायत निवारण केंद्र स्थापित किए गए? क्या नागरिकों को यह बताया गया कि शुल्क किस आधार पर तय हुआ और वसूला गया पैसा कहां खर्च होगा? यदि ये व्यवस्थाएं पहले से मौजूद नहीं हैं तो केवल शुल्क लागू करना जनता से जबरन वसूली होगा ।
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शहरवासियों का आरोप है कि कई इलाकों में आज भी कचरा वाहन नियमित नहीं पहुंचते, गीला और सूखा कचरा अलग-अलग नहीं लिया जाता और शिकायतों के समाधान की कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती। इसके बावजूद शुल्क लागू करने की जल्दबाजी पर लोग कटाक्ष कर रहे हैं कि “व्यवस्था बाद में बनेगी, लेकिन बिल समय पर जरूर आएगा।”
अब शहर की जनता नगर निगम, अजमेर के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग कर रही है कि पहले सुप्रीम कोर्ट और NGT से जुड़े लंबित आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, आनासागर और शहर की सफाई व्यवस्था का वास्तविक ऑडिट सामने लाया जाए, शिकायत निवारण केंद्र और हेल्पलाइन शुरू की जाए तथा हर वार्ड में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नागरिकों का कहना है कि उसके बाद ही किसी प्रकार का “यूजर चार्ज” लागू किया जाना उचित होगा, अन्यथा यह पूरा अभियान “स्वच्छता” से ज्यादा “वसूली” का अभियान बनकर रह जाएगा।
अजमेर| नगर निगम,अजमेर उपायुक्त महोदय द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के नाम पर “यूजर चार्ज” वसूली की सार्वजनिक सूचना जारी की गई । सूचना जारी होते ही शहर की जनता ने निगम पर ही सवालों का अंबार लगा दिया।
अजमेर की जनता और कानूनी जानकार निगम के आलाअधिकारियों से अब पूछ रहे हैं कि जो नगर निगम वर्षों से कई महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायिक और पर्यावरणीय आदेशों की पूर्ण अनुपालना नहीं कर पाया, वही निगम शुल्क वसूली के मामले में इतनी सक्रियता आखिर कहां से ले आया? शहर में चर्चा है कि अजमेर में कई योजनाएं कागजों में चमकती जरूर हैं, लेकिन जमीन पर हालात अक्सर उलट दिखाई देते हैं।
नगर निगम, अजमेर ,वर्षों से सफाई, प्रदूषण नियंत्रण और संरक्षण के दावे करता आ रहा है । समय-समय पर अदालतों और प्रशासनिक बैठकों में झील को बचाने के बड़े-बड़े वादे भी हुए, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि आज भी गंदे नालों का पानी झील के अंदर जा रहा , सफाई व्यवस्था और संरक्षण कार्यों को लेकर सवाल खत्म नहीं हुए। शहर में अब व्यंग के साथ यह चर्चा भी होने लगी है कि “आनासागर पूरी तरह साफ हुआ या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन जनता की जेब साफ करने की तैयारी जरूर पूरी दिखाई दे रही है।”
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों के द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर समय-समय पर सख्त निर्देश दिए , मगर शहर के कई हिस्सों में आज भी कचरे के ढेर, अनियमित सफाई व्यवस्था और वैज्ञानिक निस्तारण की कमी देखी जा सकती है। कई वार्डों के लोग आरोप लगा रहे हैं कि नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण तक सुनिश्चित नहीं है। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मूल व्यवस्था ही पूरी तरह व्यवस्थित नहीं है तो “यूजर चार्ज” आखिर किस उपलब्धि का लिया जाएगा?
सेवन वंडर और सागर विहार पाथवे की लाइटें,सफाई, कैमरों का क्षतिग्रस्त होना खुल्ले आम दिखा रहा है कि निगम किस प्रकार संवेदक को आंख बंद कर भुगतान कर रहा वहीं आनासागर पाथवे जैसी परियोजनाओं को लेकर भी समय-समय पर रखरखाव और व्यवस्थाओं पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जनता के करोड़ों रुपयों से बनी परियोजना धराशाही हो गई, जवाबदेही किसी की तय नहीं हुई , लेकिन जनता से शुल्क लेने के मामले में निगम की कार्यशैली अचानक अत्यंत चुस्त दिखाई देने लगी ।
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत के आदेश/निर्देशों का अर्थ केवल “यूजर चार्ज” वसूलना नहीं है। अदालत ने वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली पर भी समान रूप से जोर दिया है। विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या नगर निगम ने वार्डवार सेवा गारंटी जारी की? क्या शिकायत निवारण केंद्र स्थापित किए गए? क्या नागरिकों को यह बताया गया कि शुल्क किस आधार पर तय हुआ और वसूला गया पैसा कहां खर्च होगा? यदि ये व्यवस्थाएं पहले से मौजूद नहीं हैं तो केवल शुल्क लागू करना जनता से जबरन वसूली होगा ।
शहरवासियों का आरोप है कि कई इलाकों में आज भी कचरा वाहन नियमित नहीं पहुंचते, गीला और सूखा कचरा अलग-अलग नहीं लिया जाता और शिकायतों के समाधान की कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती। इसके बावजूद शुल्क लागू करने की जल्दबाजी पर लोग कटाक्ष कर रहे हैं कि “व्यवस्था बाद में बनेगी, लेकिन बिल समय पर जरूर आएगा।”
अब शहर की जनता नगर निगम, अजमेर के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग कर रही है कि पहले सुप्रीम कोर्ट और NGT से जुड़े लंबित आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, आनासागर और शहर की सफाई व्यवस्था का वास्तविक ऑडिट सामने लाया जाए, शिकायत निवारण केंद्र और हेल्पलाइन शुरू की जाए तथा हर वार्ड में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नागरिकों का कहना है कि उसके बाद ही किसी प्रकार का “यूजर चार्ज” लागू किया जाना उचित होगा, अन्यथा यह पूरा अभियान “स्वच्छता” से ज्यादा “वसूली” का अभियान बनकर रह जाएगा।
