नई दिल्ली,अजमेर| राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर से देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया को जैसलमेर बेसिन के दांडे गैस क्षेत्र में “उभरे सानू फॉर्मेशन” से पहली बार प्राकृतिक गैस भंडार ढूंढने में सफलता मिली। कंपनी के अनुसार यहां से प्रतिदिन लगभग 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन की संभावना जताई गई है। खास बात यह बताई जा रही है कि इस गैस में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा काफी कम है, जिससे इसे बेहतर गुणवत्ता और अपेाकृत स्वच्छ ईंधन माना जा रहा है।
इस उपलब्धि की पुष्टि केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री ने 23 मई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में “महत्वपूर्ण मील का पत्थर” बताया। मंत्री ने कहा कि यह सफलता घरेलू ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। इसके बाद 24 मई को कई राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी इस खोज को भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी राजस्थान लंबे समय से तेल और गैस संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन “सानू फॉर्मेशन” से पहली बार इस स्तर पर गैस प्रवाह मिलना भविष्य की नई संभावनाओं के संकेत दे रहा है। माना जा रहा है कि यदि आगे के परीक्षण और उत्पादन प्रक्रिया सफल रहती है तो जैसलमेर क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख गैस उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल भारत का ऊर्जा आयात बिल कम करने में मदद मिलेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञ इसे ऐसे समय में आई बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं जब भारत वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती ईंधन लागत के बीच घरेलू संसाधनों पर जोर दे रहा है। प्राकृतिक गैस को कोयले और पारंपरिक ईंधनों की तुलना में स्वच्छ माना जाता है, इसलिए यह खोज भारत की “गैस आधारित अर्थव्यवस्था” की नीति को भी मजबूत करेगी। अब कंपनी द्वारा आगे और परीक्षण, उत्पादन क्षमता का मूल्यांकन और आगे के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना है।
