RBI करेंसी चेस्ट से 8.7 करोड़ की चोरी, बैंक कर्मचारी गिरफ्तार

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पुराने लोहे के बॉक्स में भरकर बाहर निकाली गई नकदी, ऑडिट में खुला करोड़ों के गबन का र

नई दिल्ली/अहमदाबाद| गुजरात के अहमदाबाद शहर में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) से जुड़े करेंसी चेस्ट से 8.70 करोड़ रुपये की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा के कर्मचारी हर्षसिद्ध कडियार को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने बैंक के करेंसी चेस्ट से करोड़ों रुपये निकालकर उन्हें संपत्तियों, वाहनों और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर दिया।

पुलिस के अनुसार आरोपी हर्षसिद्ध कडियार गांधी रोड स्थित बैंक शाखा में जूनियर जॉइंट कस्टोडियन के पद पर कार्यरत था। इसी शाखा में RBI का करेंसी चेस्ट संचालित होता है, जहां विभिन्न बैंकों के लिए बड़ी मात्रा में नकदी रखी जाती है।

जांच में सामने आया कि 13 जनवरी 2026 को आरोपी ने दो कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों की मदद से पुराने लोहे के बॉक्स बाहर ले जाने का बहाना बनाया। आरोप है कि इन बॉक्सों में 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरकर करीब 8.70 करोड़ रुपये बैंक परिसर से बाहर निकाले गए। सुरक्षा कर्मियों को बताया गया कि यह कबाड़ और अनुपयोगी सामग्री है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी ने चोरी के बाद भी करीब तीन महीने तक बैंक में सामान्य रूप से काम किया ताकि किसी को उस पर शक न हो। जांच में यह भी सामने आया कि उसे विश्वास था कि 90 दिनों बाद CCTV फुटेज स्वतः डिलीट हो जाएगी और उसका अपराध छिप जाएगा। बाद में वह मेडिकल अवकाश पर चला गया और बैंक आना बंद कर दिया।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब RBI निरीक्षण से पहले बैंक में नियमित ऑडिट और नकदी सत्यापन किया गया। जांच में पता चला कि करेंसी चेस्ट से 500 रुपये के 174 बंडल गायब हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 8.70 करोड़ रुपये थी। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने कालूपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने चोरी की रकम से अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके में आलीशान बंगला खरीदा, एक दुकान और वाहन खरीदे तथा क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेश किया। पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से लगभग 2.20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं।

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इस मामले में पुलिस ने दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट मजदूर शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था तथा चोरी की शेष रकम कहां खपाई गई।

घटना ने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था और करेंसी चेस्ट मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की इतनी बड़ी चोरी के बावजूद लंबे समय तक गड़बड़ी सामने नहीं आना सुरक्षा और ऑडिट प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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