150 साल पूरे होने पर फिर उठा पुराना विवाद
भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर सियासत फिर गर्म हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस और पंडित जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाया है कि 1937 में नेहरू के नेतृत्व में वंदे मातरम के उन हिस्सों को हटा दिया गया था, जिनमें माँ दुर्गा की स्तुति थी। भाजपा ने इसे “ऐतिहासिक गलती” बताया है।
भाजपा का दावा – धर्म के डर से बदला गया गीत
भाजपा प्रवक्ता सी.आर. केसवन ने कहा कि 1937 के फैज़पुर अधिवेशन में कांग्रेस ने धर्म के आधार पर वंदे मातरम का छोटा संस्करण अपनाया। उन्होंने कहा, “नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने माँ दुर्गा वाले छंद हटाकर राष्ट्रीय भावना को कमजोर किया। यह देश की एकता पर चोट थी।”
नेहरू–बोस के पत्रों का जिक्र
भाजपा नेता ने बताया कि नेहरू ने 1 सितंबर 1937 को नेताजी सुभाषचंद्र बोस को पत्र में लिखा था कि वंदे मातरम की पृष्ठभूमि मुसलमानों को नाराज़ कर सकती है। केसवन ने कहा, “यह विचार गलत था, क्योंकि यह गीत तो भारत माता की आराधना का प्रतीक है।”
‘हिंदू विरोधी सोच’ का आरोप
भाजपा ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नेहरू की “हिंदू विरोधी मानसिकता” आज राहुल गांधी में भी दिखती है। केसवन ने कहा कि राहुल ने छठ पूजा को नाटक बताकर करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत की हैं।
मोदी करेंगे सालभर के उत्सव की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 नवंबर से वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर सालभर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत करेंगे। इस मौके पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया जाएगा तथा पूरे देश में वंदे मातरम का सामूहिक गायन होगा।
अमित शाह बोले–वंदे मातरम भारत की आत्मा की आवाज
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम आज भी देश में देशभक्ति और एकता की भावना जगाता है। उन्होंने कहा, “यह गीत सिर्फ शब्द नहीं, भारत की आत्मा की आवाज है, जिसने आज़ादी की लड़ाई में हर भारतीय को जोड़ा।”
(स्रोत: प्रभा साक्षी)
