बनास में बड़ी जब्ती, फिर भी माफिया गिरफ्त से दूर

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जहाजपुर (भीलवाड़ा)।
बनास नदी में अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ जिला विशेष टीम (डीएसटी) द्वारा की गई हालिया कार्रवाई ने प्रशासन की सक्रियता तो दिखाई, लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। फिल्मी अंदाज़ में की गई इस दबिश में भारी मात्रा में मशीनरी और वाहन जब्त किए गए, मगर हैरानी की बात यह रही कि एक भी बजरी माफिया या चालक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, डीएसटी टीम ने सादा वर्दी में डंपर के जरिए बनास नदी के उस क्षेत्र में दबिश दी, जहां लंबे समय से अवैध खनन चल रहा था। कार्रवाई के दौरान 5 जेसीबी मशीनें, 13 ट्रैक्टर और 3 डंपर जब्त किए गए। बताया गया कि टीम के कुछ सदस्य पहले से ही आसपास के रास्तों पर तैनात थे, ताकि अवैध खननकर्ताओं को घेरा जा सके।

कार्रवाई शुरू होते ही मौके पर मौजूद जेसीबी, ट्रैक्टर और डंपर चलाने वाले चालक वाहन छोड़कर फरार हो गए। परिणामस्वरूप पूरी कार्रवाई केवल मशीनों और वाहनों की जब्ती तक सीमित रह गई। जहाजपुर थाना क्षेत्र में 3 जेसीबी, 3 डंपर और 10 ट्रैक्टर जब्त किए गए, जबकि पंडेर थाना क्षेत्र में 2 जेसीबी और 3 ट्रैक्टर को पुलिस ने अपने कब्जे में लिया।

स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी और योजनाबद्ध कार्रवाई के बाद भी एक भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना, प्रशासन की रणनीति पर सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि केवल मशीनरी और वाहनों की जब्ती से बजरी माफियाओं का नेटवर्क नहीं टूटेगा। जब तक मुख्य संचालकों, चालकों और पूरे अवैध तंत्र से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक ऐसी कार्रवाइयों का असर अस्थायी ही रहेगा।

पुलिस और प्रशासन की ओर से यह जरूर कहा गया है कि अवैध बजरी खनन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में निगरानी और सख्त की जाएगी तथा अवैध नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

हालांकि, मौजूदा हालात में यह सवाल कायम है कि जब इतनी बड़ी संख्या में मशीनें और वाहन मौके पर मौजूद थे, तो एक भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में क्यों नहीं आया। अब जिले की डीएसटी टीम की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर निगाहें टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि आगे प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है और क्या वास्तव में अवैध बजरी खनन के पीछे सक्रिय माफियाओं तक कानून का हाथ पहुंच पाता है या नहीं।

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