गणतंत्र दिवस पर गूगल डूडल ने भारत के ‘गगनयान’ और ISRO के शौर्य को किया सलाम

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26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और इस वर्ष का उत्सव वास्तव में ऐतिहासिक रहा। इस बार सरकार का जमीनी उत्साह केवल राजपथ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक फैल गया है। इस गौरवशाली अवसर पर गूगल ने एक विशेष और प्रेरणादायक डूडल जारी किया, जिसमें भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमता, वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी प्रगति को अभिव्यक्त किया गया है।

नया डूडल भारत की “न्यू इंडिया” वाली उभरती छवि को अंतरिक्ष के परिप्रेक्ष्य में दिखाता है। डूडल में एक रॉकेट प्रक्षेपण की स्थिति में दिखाया गया है, जो प्रतीत होता है जैसे LVM3 आधारित यान ‘गगनयान’ की ओर इशारा कर रहा हो—भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन की प्रतीक्षा और आकांक्षा को जीवन देता हुआ। गूगल के लोगो में ग्रहों की कक्षाएँ, उपग्रहों के सौर पैनल और अंतरिक्षीय संकेत शामिल हैं, जो मंगलयान, चंद्रयान और अन्य मिशनों की सफलता के बाद भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक हैं। यह डूडल संदेश देता है कि अब भारत केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने और अंतरिक्ष के नए क्षितिज को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जहाँ डूडल ‘स्पेस पावर’ का संदेश दे रहा है, वहीं कर्तव्य पथ पर पहला ‘चरणबद्ध युद्ध संरचना’ प्रदर्शन भी इस वर्ष विशेष रहा। परेड में टी-90, अर्जुन टैंक, बीएमपी-II, नामिस-II, नाग और ब्रह्मोस मिसाइल प्लेटफॉर्म सहित अत्याधुनिक युद्ध प्रणाली शामिल की गई। इसके साथ ही, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा गठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन ने भी पहली बार परेड को आकर्षक रूप दिया।

इस वर्ष भारतीय वायु सेना मुख्य सैन्य सेवा रही, और उनके 29 विमानों के फ्लाईपास्ट ने “गौरव के साथ आकाश को छूना” के आदर्श वाक्य को साकार किया। इसमें शामिल रहे राफेल, Su-30 MKI और अपाचे जैसे युद्धक विमान शानदार समन्वय के साथ प्रदर्शित हुए।

नौसेना की झांकी में प्राचीन 5वीं शताब्दी के सिलाई वाले जहाजों से लेकर आधुनिक INS विक्रांत और GSAT-7R उपग्रह तक के समुद्री सफर को दिखाया गया, जो गूगल डूडल के ‘स्पेस’ थीम से सामंजस्य बनाता है।

गणतंत्र दिवस 2026 समावेशिता और नारी शक्ति का भी परिचायक रहा। CRPF की 140 से अधिक पुरुष कर्मियों वाली टुकड़ी का नेतृत्व सहायक कमांडेंट सिमरन बाला ने किया, जो इस बल के इतिहास में पहली बार हुआ। इसी प्रकार तोपखाना रेजिमेंट की मशीनीकृत टुकड़ियों की कमान महिला अधिकारियों के हाथ में थी—जो भारतीय सेना में महिलाओं की पहुंच का प्रतीक हैं।

इस प्रकार 26 जनवरी 2026 न केवल देश की लोकतांत्रिक विरासत का उत्सव रहा, बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक उत्कर्ष, सामरिक क्षमता और सामाजिक समावेशन का अद्वितीय संगम बनकर उभरा।

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