नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को संबोधित करते हुए इस पर्व के ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस भारत की स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक सशक्त प्रतीक है, जो राष्ट्र को नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिवस हमें एकजुट होकर राष्ट्र-निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत की शक्ति उसकी लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता में निहित है, जिनके बल पर देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक प्रेरक संस्कृत सुभाषितम साझा किया—
“पारतन्त्र्याभिभूतस्य देशस्याभ्युदयः कुतः।
अतः स्वातन्त्र्यमाप्तव्यमैक्यं स्वातन्त्र्यसाधनम्॥”
इस सुभाषितम के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि जो राष्ट्र परतंत्रता या अधिकारों से वंचित होता है, वह उन्नति नहीं कर सकता। राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब स्वतंत्रता के साथ-साथ एकता को भी मूल सिद्धांत के रूप में अपनाया जाए।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी अपने संदेश में कहा कि गणतंत्र दिवस हमें स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का अवसर देता है। उनका यह संदेश देशवासियों के लिए एक आह्वान है कि वे एकजुट होकर भारत को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें।
