मेरठ के 859 भवनों पर चला न्याय का डंडा, 15 दिन की मोहलत… फिर ध्वस्तीकरण; पूरे देश में भी सख्त संदेश
नई दिल्ली। (लाॅएजेंसी)अवैध निर्माण और सेटबैक पर कब्जे के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने साफ शब्दों में कहा कि कानून तोड़कर किए गए निर्माण को किसी भी कीमत पर वैध नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने 859 संपत्तियों में अवैध सेटबैक हटाने और चिन्हित भवनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही अवैध निर्माण करने वालों को 10 से 15 दिन का अंतिम अवसर देकर उसके बाद प्रशासन को ध्वस्तीकरण कर पूरा खर्च दोषियों से वसूलने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के रवैये पर तीखी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि यदि समय रहते कानून के अनुसार कार्रवाई होती तो आज यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। न्यायालय ने इसे केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के सभी राज्यों के लिए चेतावनी बताया।
कोर्ट ने कहा कि अवैध निर्माण को कम्पाउंडिंग या किसी प्रशासनिक आदेश के जरिए वैध नहीं बनाया जा सकता। सेटबैक पर किया गया अतिक्रमण हर हाल में हटाया जाएगा। जहां आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। यदि अधिकारी अपने कर्तव्य से विमुख होते हैं तो उनकी जवाबदेही भी तय होगी।
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यह आदेश मेरठ के शास्त्री नगर आवासीय (योजना संख्या-7) से जुड़े विशेष मामले में पारित किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के सभी आवास विकास क्षेत्रों या 25 मीटर तक के सभी प्लॉटों के लिए कोई नया सार्वभौमिक सेटबैक नियम जारी नहीं किया है। हालांकि अदालत का यह निर्णय एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्थापित करता है कि जहां भी भवन नियमों का उल्लंघन कर अवैध निर्माण हुआ है, वहां संबंधित प्राधिकरण कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन से अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। आदेश के अनुसार चिन्हित अवैध निर्माणों पर तय समयसीमा में कार्रवाई पूरी करनी होगी। यदि संबंधित लोग स्वयं अवैध हिस्सा नहीं हटाते हैं तो प्रशासन ध्वस्तीकरण करेगा और उसका खर्च भी संबंधित संपत्ति मालिकों से वसूला जाएगा।
कानून के जानकार मानते हैं कि यह फैसला केवल मेरठ तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर के विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों और आवास मंडलों के लिए एक स्पष्ट संदेश है । भवन नियमों की अनदेखी, सेटबैक पर कब्जा और अवैध व्यावसायिक उपयोग अब न्यायालय की नजर में गंभीर उल्लंघन है।
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