अलवर से जालोर तक गूंजा छात्रों का आक्रोश | जर्जर स्कूल, शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के सवाल पर सड़क पर उतरी नई पीढ़ी
जयपुर/अलवर। ( मीडियर) खबर वन न्यूज।
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर अब सवाल सिर्फ अभिभावक या शिक्षक नहीं उठा रहे, बल्कि स्कूलों के बच्चे खुद आंदोलन की आवाज बनते दिखाई दे रहे हैं। CJP से जुड़े अभियान और कार्यकर्ताओं की सक्रियता के बीच राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से छात्रों के विरोध-प्रदर्शन सामने आ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर CJP की ओर से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को गांव-गांव ले जाने की घोषणा ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है।
अलवर में जर्जर स्कूल के खिलाफ बच्चों का आंदोलन
अलवर जिले के जोधवास क्षेत्र में जर्जर स्कूल भवन और शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूली छात्रों ने आंदोलन किया। रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल भवन का एक हिस्सा गिरने से बड़ा हादसा टल गया था। इसके बाद छात्रों और ग्रामीणों ने स्कूल की स्थिति सुधारने तथा पर्याप्त स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठाई।
14 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान CJP से जुड़े आशुतोष रांका और पुलिस अधिकारी के बीच भी तीखी बहस की खबर सामने आई। आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। बाद की रिपोर्ट में रांका ने दावा किया कि सरकार ने स्कूल सुधार से जुड़ी मांगें स्वीकार कर ली हैं।
जालोर में बच्चों ने स्कूल की तालाबंदी तक की चेतावनी दी
राजस्थान के जालोर जिले के मेंगलवा गांव से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर खासा ध्यान खींचा। इसमें स्कूली बच्चे शिक्षकों की कमी को लेकर आवाज उठाते दिखाई दिए। बच्चों का कहना था कि लंबे समय से शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की जा रही है। बच्चों ने स्पष्ट किया कि जब तक पर्याप्त शिक्षक नहीं आते, वे स्कूल बंद रखने और जरूरत पड़ने पर सड़क रोकने जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।
झुंझुनूं में भी कलेक्ट्रेट पहुंच चुके हैं छात्र
इससे पहले 20 जुलाई को झुंझुनूं में स्कूली छात्रों ने भी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में चल रहे CJP आंदोलन से प्रेरणा लेते हुए छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा।
अब गांव-गांव पहुंचने की तैयारी
CJP की गतिविधियां अब केवल बड़े शहरों तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय शिक्षा समस्याओं पर केंद्रित होती दिखाई दे रही हैं। संगठन की ओर से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत गांव-गांव जाकर सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने और बुनियादी सुविधाओं की मांग उठाने की बात कही गई है।
इससे पहले CJP के राष्ट्रीय आंदोलन में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। जुलाई में दिल्ली के लंबे आंदोलन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को CJP ने अपनी बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में पेश किया था।
सवाल अब राजस्थान सरकार से
राजस्थान में बच्चों का यह आंदोलन सरकार के सामने सीधा सवाल खड़ा कर रहा है—क्या सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित भवन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं?
अगर गांव-गांव से बच्चे खुद अपनी स्कूल व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने लगें, तो यह केवल एक स्कूल की समस्या नहीं बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर पर बड़ा सवाल बन जाता है।
बच्चों की आवाज अब नारे में बदल रही है—“हम किसी से भीख नहीं मांग रहे, हम अपना हक मांग रहे हैं।”
