*Breaking:// रीवा के सिरमौर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुगबुगाहट: टाटा पावर के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए भू-तकनीकी जांच और बोर लॉगिंग अध्ययन की प्रक्रिया शुरू//*

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प्रशासनिक पत्राचार के बाद मैदानी गतिविधियां बढ़ीं; 4 बोरहोल 100 मीटर और 4 बोरहोल 50 मीटर गहराई तक प्रस्तावित, परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर

रीवा। रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में स्वच्छ और हरित ऊर्जा के नाम पर बहुत बड़ी विपदा का प्रारंभ हो चुका है। ग्राम पंचायत सरई कला के ग्राम रोझोही में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) द्वारा प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (NPP) / BSR परियोजना को लेकर मैदानी स्तर पर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की स्टैंडिंग साइट सिलेक्शन कमेटी (SSSC) से साइट चयन की मंजूरी प्राप्त करने हेतु प्राथमिक भू-तकनीकी (Geotech) जांच प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

योजना के क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर रीवा ने जारी किए दिशानिर्देश, स्थानीय लोगों में आक्रोश

कलेक्टर कार्यालय ने जारी किए निर्देशअपर जिला दण्डाधिकारी, जिला रीवा (म.प्र.) द्वारा पत्र क्रमांक 117/आर्म्स लाय/2026 (दिनांक 21 अगस्त 2026) के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिरमौर, तहसीलदार सिरमौर तथा ग्राम पंचायत सरई कला एवं रोझोही के सरपंच/सचिवों को निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र के माध्यम से इस विनाशकारी परियोजना हेतु प्रस्तावित जांचों में आवश्यक अनुमति, सहमति और पूर्ण प्रशासनिक सहयोग प्रदान करने के लिए कहा गया है।

परियोजना से जुड़ी मुख्य बिंदु और जांच प्रक्रिया:*

प्रस्तावित स्थल के तौर पर यह प्रोजेक्ट अक्षांश एवं देशांतर 24°52’32.15″एन, 81°29’55.01“ई (ग्राम रोझोही, तहसील सिरमौर, जिला रीवा) पर प्रस्तावित है। जिसके विषय में बोर लॉगिंग व ड्रिलिंग कार्य हेतु भू-तकनीकी (Geological/Geotechnical) अध्ययन के तहत कुल 08 बोर होल किए जाएंगे जिसमें 04 बोर होल 100 मीटर गहराई तक एवं 04 बोर होल 50 मीटर गहराई तक।पत्र के माध्यम से प्राप्त जानकारी अनुसार अध्ययन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी बोर होल को नियमानुसार पूरी तरह बंद (plug back) कर दिया जाएगा। इस जियो-तकनीकी जांच का कार्य फुग्रो नामक एजेंसी द्वारा किया जाता है। समस्त कार्य एनपीसीआईएल (न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के तकनीकी मानकों के अनुसार होना बताया गया है। भूवैज्ञानिक और जियो-फिजिकल अध्ययन का निष्पादन भारत सरकार के स्वायत्त संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स (एआआएम) द्वारा किया जाएगा।

रीवा के सिरमौर रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए भू-तकनीकी जांच और बोरहोल प्रक्रिया

*स्वच्छ ऊर्जा का दावा जबकि हकीकत में खतरों से भरी परियोजना, रेडिएशन से कैंसर और जन्मजात अपंगता जैसे खतरे*

दावे किए जा रहे हैं कि यह प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उधर एक तरफ प्रशासन का कहना है कि यह एक राष्ट्रीय महत्व की स्वच्छ ऊर्जा परियोजना है, जिससे भविष्य में क्षेत्र का ढांचागत विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। जबकि लोगों का आरोप है कि इस परियोजना की वजह से लोगों को भारी संख्या में विस्थापित होना पड़ेगा एवं यदि वह अपने घर बार और जमीन नहीं छोड़ते हैं तो आने वाले समय में वह और उनके परिवार भीषण और खतरनाक विकिरण के शिकार होंगेजिससे असाध्य बीमारियों जैसे कैंसर, ल्यूकेमिया थायराइड जेनेटिक मोडिफिकेशन जन्मजात अपंगता के शिकार होंगे।

ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा की भूमिका काफी

अब देखना यह है कलेक्टर रीवा के कार्यालय से जारी किए गए इस निर्देश के बाद ग्राम पंचायत सरई कला क्या निर्णय लेती है? बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्राम पंचायत सरई हजारों लाखों लोगों के जीवन को संकट में डालने वाली इस न्यूक्लियर पावर प्लांट योजना को लगाए जाने की अनुमति देती है अथवा इसका विरोध करती है? सवाल तो कई हैं लेकिन एक बात तय है जिस परियोजना को लेकर अभी तक असमंजस की स्थिति थी वह इस प्रशासनिक पत्राचार से सबके सामने आ चुकी है और यह तय हो गया है शासन प्रशासन की मंशा आमजन की भावना के उलट रोझौही ग्राम के शासकीय भूभाग में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाए जाने की है। अब देखना यह है जनता उसका किस प्रकार विरोध करती है।

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर परियोजना का किया विरोध

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी का कहना है उनके और सैकड़ों हजारों लोगों द्वारा प्रधानमंत्री के नाम पर ज्ञापन दिए जाने के बाबजूद एवं इसका विरोध किए जाने के बाद भी शासन प्रशासन द्वारा टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाए जाने में तेजी यह साबित करती है कि यह सरकार आमजन की भावना के विपरीत मनमानी पर उतारू है एवं आमजन को जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के लगने के बाद लोगों का जीना दूभर हो जाएगा और आने वाली सैकड़ों पीढ़ियों के लिए यह बड़ा खतरा है। शिवानंद ने सरकार को आगाह किया है यदि रोझौही ग्राम में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया जाता है तो जनता इसका भरपूर विरोध करेगी। आवश्यकता पड़ेगी तो जनहित के लिए न्यायालय की शरण भी लेना पड़ेगा।

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