नई दिल्ली। (मीडिया)संसद का मानसून सत्र सोमवार को उस समय राजनीतिक व्यंग्य का मंच बन गया, जब कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी चश्मे पर ‘मोदिया’ और ‘बिंद’ लिखी पर्चियां लगाकर संसद पहुंचीं। इस अनोखे अंदाज के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार और उसके समर्थकों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला।
चौधरी का इशारा साफ तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के समर्थकों पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के समर्थन में खड़े लोगों को देश में घट रही वास्तविक घटनाएं दिखाई नहीं दे रही हैं।
‘चोरी नहीं दिखती, पुल गिरना , पेपर लीक नहीं दिखता…’
रेणुका चौधरी ने अपने प्रदर्शन के जरिए सवाल उठाया कि यदि देश में चोरी, पुल गिरने,पेपर लीक और अन्य गंभीर घटनाएं हो रही हैं तो सत्ता पक्ष और उसके समर्थक उन मुद्दों को क्यों नहीं देख रहे हैं। उनके इस अंदाज का मकसद सरकार को जवाबदेही के कटघरे में खड़ा करना था।
संसद परिसर में उनका यह अंदाज देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया। एक ओर विपक्ष सरकार पर जनता से जुड़े सवालों से बचने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष विपक्ष के विरोध के तरीकों पर सवाल उठाता रहा है।
चश्मा बना राजनीतिक संदेश
रेणुका चौधरी का ‘मोदिया-बिंद’ वाला चश्मा महज एक राजनीतिक स्टंट नहीं, बल्कि विपक्ष की उस रणनीति का हिस्सा दिखाई दिया जिसमें व्यंग्य, प्रतीक और तीखे नारों के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।
उनका संदेश था कि लोकतंत्र में सत्ता का समर्थन करना अलग बात है, लेकिन देश में हो रही घटनाओं पर आंखें बंद कर लेना जनता के हित में नहीं हो सकता।
समर्थकों के लिए राजनीतिक चेतावनी
रेणुका चौधरी के इस प्रदर्शन का सबसे तीखा संदेश सत्ता समर्थकों के लिए था—सरकार के समर्थन में खड़े रहिए, लेकिन सवाल पूछने और सच देखने की क्षमता मत खोइए।
‘मोदिया-बिंद’ का यह चश्मा अब संसद की राजनीति में एक नए राजनीतिक तंज का प्रतीक बन गया है। विपक्ष का संकेत साफ है—सत्ता चाहे कितनी मजबूत क्यों न हो, जनता के सवालों को नजरअंदाज करने पर विपक्ष सवाल पूछता रहेगा।
और सत्ता पक्ष के लिए संदेश भी उतना ही स्पष्ट—राजनीति में समर्थन स्थायी हो सकता है, लेकिन लोकतंत्र में जवाबदेही से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं।
