नेता वही ,मैदान वही, शिकारी वही, शिकार वही, शहर वही,जनता वही , सवाल नए युवा भारत का – देवेन्द्र सक्सैना – अजमेर की हकीकत
भ्रष्ट अभियंताओं के हाथों, अजमेर का विकास और आने वाला चुनाव जागरूक बनो देश बचाओ
अजमेर। आनासागर के आसपास नालों की ट्रैपिंग प्रणाली के उन्नयन और झील के कायाकल्प पर ₹22.60 करोड़ खर्च करने की तैयारी है। लेकिन इस प्रोजेक्ट के साथ अजमेर की जनता के सवाल सामने —जिस तकनीकी तंत्र और अधिकारियों के कार्यकाल में शहर की सीवरेज, ड्रेनेज और झील प्रदूषण की समस्या लगातार बनी रही, क्या उसी व्यवस्था के भरोसे फिर करोड़ों रुपये का नया प्रयोग किया जाएगा?
जनता यह जानना चाहती है कि इस परियोजना को लागू करने के लिए क्या स्वतंत्र विशेषज्ञों और नई तकनीकी टीम को जिम्मेदारी दी जाएगी या वर्षों से नगर निगम में ही पले बड़े अभियंताओं को महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे अधिकारियों के भरोसे ही पूरा प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि NGT के समक्ष प्रस्तुत मामलों में अजमेर में नालों से आनासागर में प्रदूषित पानी पहुंचने और सीवरेज व्यवस्था की कमियों का मुद्दा सामने आ चुका है। एक मामले में 13 नालों से आनासागर में अपशिष्ट जल पहुंचने का आरोप दर्ज हुआ था।
ACB मामलों और जांचों पर भी सरकार को पारदर्शिता दिखानी होगी
अजमेर नगर निगम के अधिकारियों और अभियंताओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों का इतिहास भी जनता के सवालों को गंभीर बनाता है। नगर निगम के वर्तमान xen पर एसीबी में मामला दर्ज होने के बावजूद प्रमोशन देकर पड़ दिया गया जो मानियाजी के आँखों के तारे बने हुए है
ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायालय का विषय है, लेकिन जनता का सवाल यह है कि जिन अधिकारियों के विरुद्ध ACB जांच, अभियोजन या विभागीय कार्रवाई लंबित हो, उन्हें करोड़ों रुपये की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में संवेदनशील तकनीकी और वित्तीय जिम्मेदारियां देने से पहले सरकार की स्पष्ट नीति क्या है?
यदि किसी वर्तमान अधिकारी के विरुद्ध ACB में मामला या जांच लंबित है, तो उसका केवल आरोप होना दोष सिद्ध होना नहीं है। लेकिन सरकार को यह जरूर स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे अधिकारी की भूमिका क्या, किस स्तर पर उन्हें अजमेर के प्रमुख पदों पर रखाबगया है और क्य उन्हें परियोजना से संबंधित निर्णय लेने की जिम्मेदारी दी गई है।
‘अजमेर के लिए वही घिसे पीते अभियंता क्यों ? बाहर से विशेषज्ञ क्यों नहीं?’
आनासागर कोई सामान्य निर्माण परियोजना नहीं है। यह जल निकाय, सीवरेज, पर्यावरण, पंपिंग, हाइड्रोलॉजी और शहरी ड्रेनेज से जुड़ा जटिल प्रोजेक्ट है।
इसलिए जनता का सवाल वाजिब है कि—
क्या परियोजना के लिए स्वतंत्र जल-प्रबंधन विशेषज्ञ, पर्यावरण अभियंता, सीवरेज विशेषज्ञ और हाइड्रोलॉजिकल विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है?
यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
क्या वही अधिकारी इस परियोजना की निगरानी करेंगे, जिनके कार्यकाल में पहले की योजनाओं के परिणामों पर सवाल उठे?
पुराने अनुभवों से सरकार ने क्या सीखा?
अजमेर में पहले भी बड़े प्रोजेक्टों पर करोड़ों रुपये खर्च हुए। आनासागर पाथवे, सेवन वंडर्स और स्मार्ट सिटी के कई कार्यों को लेकर बाद में उपयोगिता, रखरखाव, कानूनी स्थिति और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे। 2025 की एक रिपोर्ट में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बने कुछ ढांचों के हटने या अनुपयोगी होने पर सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए थे ।
ऐसे अनुभवों के बाद अब जनता चाहती है कि नई परियोजना की जिम्मेदारी केवल विभागीय अधिकारियों तक सीमित न रहे, बल्कि इसकी स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय निगरानी भी हो।
सागर विहार की बंद लाइटों से लेकर ₹22.60 करोड़ तक—जवाबदेही कौन तय करेगा?
एक ओर करोड़ों रुपये की नई परियोजना का उद्घाटन होगा, दूसरी ओर यदि आनासागर क्षेत्र की मौजूदा सुविधाओं—जैसे सागर विहार पाथवे की बंद लाइटों—का रखरखाव नहीं हो पा रहा है, तो जनता का सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या सरकार नई परियोजना के साथ पुरानी परियोजनाओं की भी जिम्मेदारी तय करेगी?
क्या उद्घाटन के मंच से यह बताया जाएगा कि—
पिछले आनासागर प्रोजेक्टों पर कितना पैसा खर्च हुआ?
उनकी वर्तमान स्थिति क्या है?
कौन-कौन से काम बंद या खराब हैं?
उनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
नए ₹22.60 करोड़ के प्रोजेक्ट की निगरानी कौन करेगा?
क्या स्वतंत्र थर्ड-पार्टी तकनीकी ऑडिट होगा?
क्या DPR और BOQ जनता के लिए सार्वजनिक होंगे?
और यदि परियोजना विफल होती है तो जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होगी?
अजमेर को इस बार उद्घाटन नहीं, परिणाम चाहिए
अजमेर की जनता अब केवल यह नहीं पूछ रही कि नया काम कौन शुरू कर रहा है। सवाल इससे बड़ा है—
“नए काम की इंजीनियरिंग कौन करेगा, उसकी निगरानी कौन करेगा और उसकी जवाबदेही किसकी होगी?”
यदि सरकार वास्तव में आनासागर को बचाना चाहती है, तो उसे इस बार पुरानी कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर नई तकनीकी सोच और स्वतंत्र विशेषज्ञता को मौका देना होगा।
ACB में दर्ज किसी भी मामले में अंतिम दोषसिद्धि से पहले किसी अभियंता को दोषी कहना उचित नहीं है। लेकिन जनता यह जरूर पूछ सकती है कि जांचाधीन या अभियोजन से जुड़े अधिकारियों को इतनी बड़ी परियोजनाओं में क्या भूमिका दी गई है और सरकार ने हितों के टकराव से बचने के लिए क्या व्यवस्था की है।
27 जुलाई का उद्घाटन इसलिए महत्वपूर्ण है। क्या मंच से सिर्फ परियोजना का उद्घाटन होगा, या अजमेर की जनता को पहली बार यह भी बताया जाएगा कि ₹22.60 करोड़ की इस योजना की तकनीकी जिम्मेदारी किन अभियंताओं के हाथ में होगी?
क्योंकि आनासागर को बचाने का सवाल किसी एक अधिकारी, किसी एक दल या किसी एक सरकार का नहीं—यह अजमेर के भविष्य का सवाल है।
