पुलिस की बड़ी कार्रवाई में 5 आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल-लैपटॉप से लेकर एटीएम कार्ड तक बरामद; रीवा को ठिकाना बनाकर दूसरे राज्यों में बिछाया था ऑनलाइन ठगी का जाल
रीवा। साइबर अपराध की दुनिया में तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग के बीच रीवा पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर लोगों के मोबाइल फोन तक पहुंच बनाकर उनके बैंक खातों को निशाना बना रहा था। पुलिस कार्रवाई में गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम/डेबिट कार्ड, नकदी और साइबर गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान बरामद किया गया है।जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क रीवा से संचालित होकर दूसरे राज्यों तक फैला हुआ था। आरोपियों पर APK फाइल के जरिए मोबाइल में सेंध लगाने और उसके बाद बैंकिंग संबंधी जानकारी का दुरुपयोग कर रकम निकालने का आरोप है।
एक फाइल और पूरा मोबाइल खतरे में
साइबर ठगों का तरीका बेहद शातिर बताया जा रहा है। गिरोह कथित तौर पर पहले अपने निशाने पर आए व्यक्ति को व्हाट्सऐप अथवा किसी अन्य डिजिटल माध्यम से APK फाइल भेजता था। अलग-अलग बहानों के जरिए पीड़ित को उस फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल करने के लिए तैयार किया जाता था।फाइल इंस्टॉल होने के बाद मोबाइल की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच हासिल करने की कोशिश की जाती थी। इसके बाद बैंकिंग एप्लीकेशन और अन्य वित्तीय जानकारियों का दुरुपयोग कर खाते से रकम निकालने की वारदात को अंजाम दिए जाने का आरोप है।
रीवा बना था नेटवर्क का ठिकाना
पुलिस की जांच के मुताबिक आरोपी रीवा में रहकर दूसरे राज्यों के लोगों को अपना निशाना बना रहे थे। गिरोह की गतिविधियों के तार उत्तराखंड और गुजरात के सूरत समेत अन्य स्थानों से जुड़े होने की बात सामने आई है।यानी अपराधी एक शहर में बैठकर दूसरे राज्य के मोबाइल नंबरों और बैंक खातों को निशाना बना रहे थे। साइबर अपराध की यही बदलती तस्वीर पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में छिपे हैं कई राज
पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और लैपटॉप के अलावा एटीएम एवं डेबिट कार्ड तथा अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। नकदी भी मिलने की जानकारी है।अब इन उपकरणों की जांच को मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। मोबाइल और लैपटॉप से मिले डेटा, संपर्क नंबर, डिजिटल लेन-देन तथा बैंकिंग गतिविधियों के जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।
सिर्फ पांच गिरफ्तारियां नहीं, बड़े नेटवर्क की तलाश
पुलिस की कार्रवाई को महज पांच आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। साइबर अपराध में अक्सर सामने मौजूद व्यक्ति के पीछे पूरा नेटवर्क काम करता है। ऐसे में जांच एजेंसियों की नजर अब कथित गिरोह के मुख्य संचालकों, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और अन्य सहयोगियों पर होगी।यदि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में बड़ी संख्या में पीड़ितों या लेन-देन के प्रमाण मिलते हैं तो इस कार्रवाई के बाद साइबर ठगी की कई और वारदातों का खुलासा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस की अपील—APK फाइल को हल्के में न लें

साइबर ठगी के इस मामले ने एक बार फिर मोबाइल उपयोगकर्ताओं को सावधान रहने का संदेश दिया है। किसी अनजान नंबर से आई APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करना भारी पड़ सकता है। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई एप्लीकेशन इंस्टॉल करने से भी बचना चाहिए।बैंक खाते की जानकारी, OTP, PIN, पासवर्ड अथवा अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। खाते से किसी तरह का संदिग्ध लेन-देन दिखाई दे तो बिना देरी किए बैंक और पुलिस/साइबर सेल को सूचना देना जरूरी है।रीवा पुलिस की यह कार्रवाई इसलिए अहम है क्योंकि इसने यह सवाल फिर सामने खड़ा किया है कि साइबर अपराधी कहीं भी बैठकर कहीं भी वार कर सकते हैं—लेकिन डिजिटल साक्ष्य उनके पीछे पहुंचने का रास्ता भी छोड़ते हैं।
