गोरसरी के सरकारी स्कूल में औचक निरीक्षण के दौरान खुली पढ़ाई की पोल, संविधान, विज्ञान और सामान्य ज्ञान के बुनियादी सवालों पर खामोश रहे छात्र; कलेक्टर बोलीं—पांच महीने में सुधार नहीं हुआ तो होगी कड़ी कार्रवाई
मैहर। मध्यप्रदेश के मैहर जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत गोरसरी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के औचक निरीक्षण पर पहुंचीं कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने जब कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों से पढ़ाई से जुड़े बुनियादी सवाल पूछे, तो सामने आया कि करीब 60 विद्यार्थियों में से एक भी छात्र-छात्रा सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।कलेक्टर ने विद्यार्थियों से केवल कठिन विषयों के सवाल नहीं पूछे, बल्कि संविधान, उर्वरक, बायोलॉजिकल सेल, सामान्य ज्ञान और कलेक्टर की भूमिका जैसे बुनियादी प्रश्न किए। लेकिन अधिकांश विद्यार्थी जवाब देने में असमर्थ नजर आए। स्थिति ऐसी रही कि जब विद्यार्थियों से पूछा गया कि कलेक्टर कैसे बनते हैं और उनका काम क्या होता है, तो एक छात्रा ने कलेक्टर के काम को स्कूल का निरीक्षण करने और व्यवस्थाएं संभालने तक सीमित बताया।
कक्षा में ही सामने आ गई शिक्षा व्यवस्था की हकीकत
औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उनकी विषयगत समझ को परखा। सवाल-जवाब के दौरान विद्यार्थियों का प्रदर्शन अपेक्षित शैक्षणिक स्तर से काफी नीचे पाया गया। इसके बाद कलेक्टर ने विद्यालय में पढ़ाई की स्थिति और शिक्षकों की भूमिका को लेकर नाराजगी जाहिर की।कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि परीक्षाओं में अभी करीब पांच महीने का समय है। ऐसे में विद्यार्थियों की शैक्षणिक स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त समय मौजूद है, लेकिन यदि इस अवधि में स्थिति नहीं सुधरी तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
प्राचार्य और राजनीति शास्त्र के अतिथि शिक्षक को नोटिस
विद्यालय में शैक्षणिक स्तर कमजोर पाए जाने पर कलेक्टर ने प्राचार्य ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह तथा राजनीति शास्त्र के अतिथि शिक्षक रामप्रकाश तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।कलेक्टर ने चेतावनी दी कि विद्यार्थियों की पढ़ाई में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर बनीं ‘मास्टर’, खुद संभाली कक्षा
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने कक्षा 10वीं में विद्यार्थियों से शिक्षक की तरह संवाद किया और पढ़ाई के साथ-साथ उनके भविष्य और करियर को लेकर भी बातचीत की।उन्होंने विद्यार्थियों को विषयों को समझकर पढ़ने, सामान्य ज्ञान बढ़ाने और भविष्य के लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद करते हुए यह संदेश भी दिया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी बेहतर शिक्षा और बेहतर अवसर मिलना चाहिए।
सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं रहा निरीक्षण
कलेक्टर के दौरे का दायरा केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने क्षेत्र में शासकीय उचित मूल्य की दुकान और आंगनवाड़ी केंद्र का भी निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
सबसे बड़ा सवाल—बच्चों की पढ़ाई का जिम्मेदार कौन?
गोरसरी के सरकारी स्कूल में सामने आई स्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थी संविधान, विज्ञान और सामान्य ज्ञान जैसे बुनियादी विषयों पर जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं, तो आखिर उनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी किसकी है?कलेक्टर की कार्रवाई ने कम से कम इतना स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल स्कूल में उपस्थिति दर्ज होना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। विद्यार्थी क्या सीख रहे हैं और उनका शैक्षणिक स्तर कितना सुधर रहा है, इसकी भी जवाबदेही तय होगी।अब निगाहें आने वाले पांच महीनों पर हैं। देखना होगा कि नोटिस और कड़ी चेतावनी के बाद गोरसरी के इस सरकारी स्कूल में पढ़ाई का स्तर कितना बदलता है और विद्यार्थियों को वास्तव में उसका कितना लाभ मिलता है।
