पहाड़ के बेटे ने आसमान में लिखी नई इबारत, ‘हैपिडा स्काइनेक्स’ ने भरी उड़ान

Spread the love

अल्मोड़ा के रवि टम्टा का कमाल—खुद तैयार किया सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल, प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सफल ट्रायल

नईदिल्ली/अल्मोड़ा। (मीडिया) पहाड़ों में अक्सर संघर्ष की कहानियां जन्म लेती हैं, लेकिन अल्मोड़ा के एक युवा ने अपनी कल्पना को पंख देकर आसमान तक पहुंचाने का प्रयास किया है। सीमित संसाधनों के बीच तकनीक का प्रयोग करते हुए रवि टम्टा ने स्वयं तैयार किए गए सिंगल-सीटर फ्लाइंग व्हीकल ‘हैपिडा स्काइनेक्स (Hapida Skynex)’ की ट्रायल उड़ान भरकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

स्थानीय हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम में हुए ट्रायल के दौरान जब इलेक्ट्रिक पावर से संचालित फ्लाइंग व्हीकल ने जमीन से ऊपर उठकर उड़ान भरी, तो मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य किसी रोमांचक तकनीकी प्रयोग से कम नहीं था। ट्रायल के दौरान जिलाधिकारी अंशुल सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर. घोड़के भी मौजूद रहे।

पेट्रोल-डीजल नहीं, बिजली से उड़ेगा

‘हैपिडा स्काइनेक्स’ की सबसे खास बात इसका पूर्णतः इलेक्ट्रिक पावर आधारित होना है। रवि टम्टा ने इसे अपने तकनीकी कौशल और प्रयोगधर्मी सोच के दम पर तैयार किया है। सिंगल-सीटर डिजाइन वाला यह फ्लाइंग व्हीकल भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित व्यक्तिगत हवाई परिवहन की संभावनाओं की ओर संकेत करता है।

हालांकि किसी भी मानव-सवार उड़ान उपकरण को व्यापक उपयोग में लाने से पहले उसकी उड़ान क्षमता, बैटरी, संरचनात्मक मजबूती, नियंत्रण प्रणाली और अन्य सुरक्षा मानकों का विस्तृत तकनीकी परीक्षण तथा संबंधित नियामकीय स्वीकृतियां आवश्यक होंगी।

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल पर की बात

रवि टम्टा के इस नवाचार की चर्चा देहरादून तक पहुंची तो मुख्यमंत्री ने उनसे वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयास की सराहना करते हुए इसे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। साथ ही नवाचार को आगे बढ़ाने में हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

प्रशासन ने बताया गौरव का विषय

जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने रवि टम्टा के प्रयास को जनपद के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और उचित मंच मिलने से युवा नई सोच के साथ विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। प्रशासन की ओर से नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव सहायता का आश्वासन भी दिया गया।

सीमित संसाधन, बड़ा सपना

रवि टम्टा की कहानी केवल एक फ्लाइंग मशीन के परीक्षण तक सीमित नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जिसमें संसाधन सीमित होने के बावजूद कल्पना की कोई सीमा नहीं होती। पहाड़ की धरती से निकलकर आसमान में उड़ान भरने वाला यह प्रयोग युवाओं के भीतर छिपी तकनीकी प्रतिभा और आत्मनिर्भर नवाचार की संभावनाओं को भी सामने लाता है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि ‘हैपिडा स्काइनेक्स’ का यह शुरुआती प्रयोग आगे किस मुकाम तक पहुंचता है। यदि इसके तकनीकी और सुरक्षा मानकों को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया जाता है, तो अल्मोड़ा का यह प्रयोग स्वच्छ ऊर्जा आधारित व्यक्तिगत उड़ान तकनीक की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम साबित हो सकता है।

पहाड़ों में जन्मा सपना जब आसमान तक पहुंचता है, तो वह सिर्फ उड़ान नहीं होती—वह आने वाले कल की एक झलक होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *