अजमेर की सड़कों पर मौत बेखौफ,नो-एंट्री में दौड़ते यमदूत जिम्मेदारी से भागता सिस्टम

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कैसे थमेगा मौत का तांडव?
खुलेआम घूम रहे यमदूत बने बजरी डंपर

अजमेर। 24जनवरी अजमेर की सड़कों पर मौत बेखौफ दौड़ रही है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। खबर वन न्यूज ने कल जिस अवैध बजरी परिवहन का खुलासा किया था, आज वही डंपर बिना नम्बर प्लेट के, नो-एंट्री जोन में लगे कैमरों को चकमा देता हुआ शहर की गलियों में घुस गया। सवाल यह है कि जब हर चौराहे पर कैमरे हैं, पुलिस चौकसी के दावे हैं, तो यह डंपर आखिर किसकी मेहरबानी से शहर में घुसा?

कल की खबर का लिंक:

सुबह का वक्त—स्कूली बच्चे, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, बाजारों की हलचल—और उसी भीड़ में रफ्तार भरते बजरी से लदे डंपर। यह सीधा-सीधा आम जनता की जान से खिलवाड़ है। जब इस बारे में थाना क्रिश्चियनगंज को पुनः सूचना दी गई, तो जवाब मिला— “हम कोई कार्रवाई नहीं कर सकते, यह माइनिंग विभाग का मामला है।”
तो फिर सवाल उठता है कि नो-एंट्री जोन में कानून तोड़कर दौड़ते डंपर पर कार्रवाई किसकी जिम्मेदारी है? पुलिस की, माइनिंग की या फिर मौत के बाद जांच कमेटी की?

अजमेर में बजरी डंपरों ने पहले भी कई परिवार उजाड़े हैं। इसके बावजूद प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अवैध बजरी माफियाओं को अप्रत्यक्ष संरक्षण देता नजर आ रहा है। जब तथ्यात्मक जानकारी, फोटो सहित विवरण पुलिस कंट्रोल रूम, एसपी कंट्रोल रूम, थाने और एसपी साहब तक पहुंचा दिया गया, फिर भी न डंपर पकड़ा गया, न कोई कार्रवाई हुई—तो यह ढिलाई नहीं, बल्कि मौतों से मुंह फेरना है।

प्रशासन की यह निष्क्रियता सवालों के घेरे में है। क्या अवैध बजरी परिवहन को खुली छूट दी जा चुकी है? क्या आम नागरिक की जान की कीमत शून्य हो गई है? अगर आज भी कार्रवाई नहीं होती, तो आने वाली किसी भी दुर्घटना की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।

ऐसा लगता है कि सिस्टम ने हाथ खड़े कर दिए हैं और आम जनता को अपने बच्चों, अपने परिवार की सुरक्षा खुद करनी होगी। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। अब भी वक्त है—प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे, अवैध डंपरों को जब्त करे, जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करे—वरना यह मौत का तांडव किसी और मासूम की जान लेकर ही थमेगा।

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