जन गण मन की तर्ज पर वंदे मातरम् के लिए बनेंगे नियम ?

राष्ट्रीय गीत के प्रोटोकॉल पर मंथन -केंद्र सरकार

नई दिल्ली। राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की तरह अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के लिए भी औपचारिक नियम और प्रोटोकॉल तय किए जाने की संभावना पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय स्तर पर हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में यह मुद्दा उठा कि क्या ‘वंदे मातरम्’ के गायन और प्रस्तुति के दौरान भी वही अनुशासनात्मक और सम्मान संबंधी दिशानिर्देश लागू होने चाहिए, जो वर्षों से राष्ट्रीय गान के लिए निर्धारित हैं।

सम्मान और अनुशासन पर फोकस

सरकार के विचार-विमर्श का केंद्र बिंदु यह है कि ‘वंदे मातरम्’ के गायन के समय सार्वजनिक और सरकारी कार्यक्रमों में लोगों का आचरण कैसा हो। इसमें गाने के दौरान खड़े होने, समारोहों में इसकी प्रस्तुति की प्रक्रिया, और किसी भी तरह के अनादर को रोकने के उपाय शामिल हो सकते हैं। अभी तक ‘वंदे मातरम्’ के लिए कोई बाध्यकारी कानूनी प्रोटोकॉल नहीं है, जबकि ‘जन गण मन’ के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियम मौजूद हैं।

150वीं वर्षगांठ बना बड़ा कारण

इस चर्चा के पीछे एक अहम कारण यह भी माना जा रहा है कि वर्ष 2026 में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। सरकार इस अवसर को राष्ट्रीय स्तर पर बड़े सांस्कृतिक और देशभक्ति कार्यक्रमों के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में यह प्रयास किया जा रहा है कि राष्ट्रीय गीत को भी औपचारिक सम्मान और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के दायरे में लाया जाए।

क्या कानून बन सकता है?

फिलहाल सरकार की ओर से यह साफ किया गया है कि अभी कोई नया कानून या अधिसूचना जारी नहीं की गई है। यह विषय केवल विचाराधीन है। यदि आगे चलकर नियम बनाए जाते हैं, तो संभव है कि उन्हें दिशानिर्देशों के रूप में लागू किया जाए, न कि सीधे दंडात्मक कानून के रूप में। हालांकि कुछ अधिकारियों का मानना है कि अनादर की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई

 प्रावधानों पर भी चर्चा

राजनीतिक और सामाजिक बहस की संभावनायह मुद्दा सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक बहस की संभावना भी बढ़ गई है। ‘वंदे मातरम्’ ऐतिहासिक रूप से स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रहा है, लेकिन इसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर पहले भी अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं। ऐसे में यदि इसे राष्ट्रगान-जैसा प्रोटोकॉल दिया जाता है, तो इस पर राजनीतिक सहमति बनाना सरकार के लिए एक चुनौती हो सकती है।

कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह कदम अभी प्रस्ताव और चर्चा के स्तर पर है। लेकिन यदि भविष्य में ‘वंदे मातरम्’ के लिए भी औपचारिक प्रोटोकॉल तय होते हैं, तो यह राष्ट्रीय गीत के सम्मान और सार्वजनिक जीवन में उसकी भूमिका को एक नया स्वरूप दे सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह विचार केवल सांस्कृतिक पहल तक सीमित रहता है या फिर कानूनी दिशा-निर्देशों का रूप लेता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *