अजमेर। नगर निगम और आवासन मंडल के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर चल रही खींचतान के बीच अब एक नया विवाद सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उन कॉलोनियों का है, जो अभी तक आवासन मंडल के अधीन हैं और नगर निगम को विधिवत हस्तांतरित नहीं हुई हैं, बावजूद इसके निगम द्वारा कथित रूप से बहुमंजिला और व्यवसायिक भवनों के नक्शे पास किए जा रहे हैं।
हाल ही आवासन मंडल ने की थी कार्रवाई:-
अजमेर उत्तर विधान सभा में आने वाली वैशाली नगर आवासन मंडल की सेक्टर-2 कॉलोनी वीर उद्यान के पास स्थित 2G1 (अनुज्ञा पत्र संख्या: NNAJM/2025-26/BPAS/3993) और एक अन्य 2K5 में बन रही बहुमंजिला इमारतों ने इस पूरे खेल की परतें खोल दी हैं। एक ओर नगर निगम के अधिकारी लिखित रूप में यह स्वीकार कर चुके हैं कि संबंधित क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, वहीं दूसरी ओर इन्हीं क्षेत्रों में नक्शे पास किए जाने के दस्तावेज सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
पूर्व जिला कलेक्टर के आदेश …?
इस विवाद को पहले भी प्रशासनिक स्तर पर उठाया जा चुका है। तत्कालीन जिला कलेक्टर प्रकाश राज पुरोहित द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया था कि उक्त क्षेत्र आवासन मंडल के अधिकार क्षेत्र में आता है और उसी अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पत्र की प्रतिलिपि नगर निगम को भी भेजी गई थी, लेकिन आरोप है कि निगम अधिकारियों ने इस आदेश को फाइलों में दबाकर रख दिया।
दूसरी ओर, आवासन मंडल के रीजनल इंजीनियर ने साफ तौर पर कहा कि उनके पास निगम द्वारा नक्शा पास किए जाने के लिखित प्रमाण हैं, जो पूरी तरह नियमों के विपरीत है। उन्होंने बताया कि आवासन मंडल की अहस्तांतरित कॉलोनियों में नक्शा जारी करने का अधिकार केवल मंडल को है,
लेकिन निगम द्वारा यह अधिकार क्षेत्र लांघा जा रहा है। मंडल को इस संबंध में कई शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं जिन्हें (आवंटियों) नोटिस भेज जवाब मांगा गया है , लेकिन संसाधनों की कमी और निगम के असहयोग के चलते कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पा रही।
इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किन दबावों या प्रभावों में आकर नियमों को दरकिनार कर उक्त क्षेत्र में नक्शे पास कर रहा है। आरोप यह भी हैं कि प्रभावशाली लोगों, भामाशाहों और रसूखदारों से मोटी साथ गांठ कर नियमों से परे जाकर लाभ पहुंचाया गया है, जबकि आम नागरिकों को नक्शा पास कराने के लिए महीनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं।
जब इस संबंध में जानकारी लेने के लिए “खबर वन न्यूज” के रिपोर्टर ने नगर निगम अधिकारियों से संपर्क किया, तो पहले छुट्टी का बहाना बनाया गया और फिर कंप्यूटर पासवर्ड न होने का हवाला देकर जानकारी देने से बचते नजर आए। वहीं, निगम आयुक्त के पर्सनल सेक्रेटरी ने भी संबंधित अभियंता के आने के बाद जानकारी देने की बात कहकर मामला टाल दिया।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी वर्षों से निगम में अपना वर्चस्व जमाए हुए हैं । उच्च अधिकारियों के सामने ये नियमों की मनमानी व्याख्या कर फाइलों को स्वीकृति दिलाना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि शहर में बिल्डर लॉबी, माफिया और कुछ जनप्रतिनिधियों के साथ निगम के इन अधिकारियों की मजबूत पकड़ बनी हुई है।
सवाल: निगम के दोषियों पर कार्रवाई होगी या प्रमोशन
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर निगम इस अवैध रूप से पास किए गए नक्शों को निरस्त कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य प्रकरणों की तरह केवल नोटिस और औपचारिकताओं तक सीमित रह जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में पट्टा प्रकरण में चार अधिकारियों को एपीओ किया गया था ।
क्या अब इस नक्शा प्रकरण के सामने आने के बाद निगम के आला अधिकारी सरकार स्वयं प्रकरण की जांच करवाने हिम्मत दिखा पाएंगे ।
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“खबर वन न्यूज” ने पूर्व में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन इसके बावजूद यदि हालात जस के तस बने हुए हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम में गहरी जड़ें जमा चुकी अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में सख्ती दिखाता है या फिर यह खबर भी प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ जाएगी।
जानें क्या है नियम:

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