“कंस्ट्रक्शन ज़ोन” में धड़ल्ले से इमारतें
दृश्य अवैध निर्माण अजमेर उत्तर ( वार्ड – 71) जो कि बीजेपी का गढ़ माना जाता है के वायरल हैं ।
आवासीय मकानों को तोड़कर अवैध रेस्टोरेंट,जिम, जॉब,मॉल सेंटर और शो-रूम चालू। कॉलोनियों में दिन-रात का शोर-शराबा, बहु-बेटियों का गलियों में निकलना तक बंद।
अजमेर में आवासीय कॉलोनियों पर संकट: भ्रष्टाचार की परतों तले दबा आमजन का हक़
अजमेर। शहर में हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम की लापरवाही और मिलीभगत ने आमजन का जीना दूभर कर दिया है। आवासीय घरों को तोड़कर खुलेआम व्यावसायिक कार्य किए जा रहे हैं। लोकतंत्र की सभी मर्यादाओं, नियमों और कानूनों को धज्जियां उड़ाते हुए कॉलोनियों का स्वरूप बिगाड़ दिया गया है।
सोशल मीडिया से उठती आवाजें
फोटो: J K शर्मा की timeline से

लोकतंत्र की मर्यादा और कानूनों को ताक पर रखकर किए जा रहे इन कामों ने आमजन की ज़िंदगी नर्क बना दी है। कॉलोनियों की गलियों में बहु-बेटियों का सुरक्षित घूमना तो दूर, खिड़की-दरवाजे तक खोलना मुश्किल हो गया है। दिन-रात का शोर-शराबा लोगों की शांति छीन चुका है।
आदेश भी दबे भ्रष्टाचार की टेबल तले
पूर्व जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए आदेशों तक को भ्रष्टाचार की टेबल के नीचे दबा दिया गया। यह स्पष्ट करता है कि आवासन मंडल और नगर निगम के कुछ अधिकारी इसमें सीधे तौर पर शामिल हैं।
वैशाली नगर सेक्टर 1, 2, 3, 10, 11, 12 और सागर बिहार जैसे नो कंस्ट्रक्शन ज़ोन में भी निर्माण जारी है। यहां न कोई नक्शा पास है, न सेटबैक छोड़ा जा रहा है। सवाल उठता है कि आखिर यह अवैध निर्माण किसकी शह पर फल-फूल रहे हैं?
📌 मानव अधिकारों का हनन
आज आमजन खासकर कमजोर वर्ग इन अवैध इमारतों से घिर गया है। उन्हें न तो साफ हवा मिल रही है, न ही सुरक्षित वातावरण। यह स्थिति सीधे तौर पर मानवाधिकार उल्लंघन का उदाहरण है।
👉 जनता की मांग:
1 इन अवैध इमारतों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर प्रशासन तुरंत सीज (Seize) कार्रवाई करे।
2 जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की वेतन, भत्ते और सभी लाभ तुरंत रोके जाएं।
3 . पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो।
अब जनता की आवाज़ साफ है – “भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने वालों को बख्शा न जाए, अवैध कब्ज़ों को तोड़कर आमजन का अधिकार वापस दिलाया जाए।”


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