“अवैध बजरी माफिया ने छीने तीन मासूमों के प्राण, न्याय और सहारा आज तक दूर”

अजमेर की पुष्कर घाटी, 7 अक्टूबर 2023 की वही काली रात… जब अवैध बजरी से लदा एक डंपर तेज़ी से पलट गया और तीन नर्सिंग छात्रों को अपने नीचे कुचल दिया। उस रात की चीखें आज भी घाटी की हवा में गूंजती हैं।
तीन परिवारों की अधूरी कहानियाँ

ये तीनों छात्र अपने घरों के इकलौते पुत्र थे। इनके कंधों पर मांओं की उम्मीदें, परिवार की जिम्मेदारियाँ और भविष्य के सपने टंगे थे। लेकिन वह सब सिस्टम की खामियों के चलते एक पल में बिखर गए।
गजेंद्र और देवेंद्र – इनके पिता पहले से ही इस दुनिया में नहीं थे। मांओं ने अकेले दम पर बेटों को पढ़ाया, पाला और उन्हें अपने भविष्य का सहारा माना। लेकिन अब वे मांएं बिल्कुल असहाय, अकेली और बेसहारा रह गई हैं।
चिराग – उसके पिता एक पत्रकार हैं। सच लिखने की कीमत उन्होंने झूठे मुकदमों में फंसकर चुकाई। दबाव और प्रताड़ना के कारण उनका सारा कामकाज ठप हो गया। फिर भी उन्होंने जो भी कमा लिया, वह सब चिराग की पढ़ाई पर ही लगा दिया। आज वही चिराग बुझ गया।
सरकार और व्यवस्था पर सवाल
सबसे पीड़ादायक यह है कि आज तक इन परिवारों तक कोई सरकारी सहायता नहीं पहुंची। न स्थानीय नेताओं ने इन्हें देखा, न प्रशासन ने सहानुभूति दिखाई। हादसे के बाद पुलिस ने डंपर और उसके चालक को तुरंत जमानत देकर छोड़ दिया। आज भी वही अवैध बजरी परिवहन धड़ल्ले से जारी है। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन न्याय कब मिलेगा? यह सवाल उन मांओं को आज भी कितना विचलित करता होगा इसका अंदाजा लगाया जाना संभव नहीं ।
. “मांओं के आंसुओं से गूंजती पुष्कर घाटी — न्याय और सहारे की पुकार”
आज जब यह तीनों मांएं अपने सूने आंगनों में बैठती हैं, तो ऐसा लगता है मानो वे किसी अंधेरी कालकोठरी में कैद हों। उनके आंसुओं में उस रात की काली छाया अब भी तैरती है। जिन बेटों ने उनके जीवन का सहारा बनना था, वही अब नहीं रहे। तीनों घरों के चिराग बुझ गए और उनके साथ उन मांओं का भविष्य भी अंधकार में डूब गया।
तीनों अपने परिवारों के इकलौते पुत्र थे, आज घरों में कमाने वाला कोई नहीं बचा
सरकार के लिए
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि संवेदनहीन तंत्र और लापरवाह रक्षक और समाज की चुप्पी जिसने तीन मांओं को आज तक सरकार से सहायता दिलाने के लिए कोई व्यवहार नहीं किया ,सरकार से मांग है कि इन शोकसंतप्त परिवारों को तुरंत सुरक्षित जीवन और आर्थिक सहारा दिया जाए। भारत माता की ये बेटियां अब अकेली न रहें, इन्हें जीने का सहारा और संबल मिले इसके स्थानीय नेतृत्व और सरकार को आगे चलकर इन माताओं का सहारा बनना चाहिए ।
पुष्कर घाटी आज भी गवाही दे रही है कि कैसे अवैध बजरी माफिया ने मासूमों की जान ली और व्यवस्था ने आंखें मूंद लीं। लेकिन इतिहास यह भी पूछेगा — क्या इन माताओं को कभी न्याय मिला?
🕯️ श्रद्धांजलि 🕯️
7 अक्टूबर 2023 की काली रात
अजमेर की पुष्कर घाटी ने तीन मांओं के चिराग बुझा दिए। तीन नर्सिंग छात्र — चिराग, देवेंद्र और गजेंद्र —
जो अपने परिवारों के भविष्य का सहारा थे,
अवैध बजरी के डंपर के नीचे कुचलकर इस दुनिया से चले गए।
गजेंद्र ने महीनों जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर
हाल ही में अंतिम सांस ली।
देवेंद्र और चिराग उसी रात काल के ग्रास बन गए।
आज ये तीनों अपने परिवारों के इकलौते पुत्र थे।
अब इनकी मांओं की आंखों में सिर्फ आंसू और दिल में असहनीय पीड़ा है।
👉 इन तीनों की याद में,
खबर वन न्यूज परिवार गहरी संवेदना प्रकट करता है।
हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि
इन मासूम आत्माओं को शांति मिले
और मांओं को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति मिले और सरकार से सहारा ।
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