ज़हर का घूंट’: कोल्ड्रिफ़ कफ सिरप ने ली मासूमों की जान, देश की दवा सुरक्षा पर गंभीर सवाल

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भोपाल/जयपुर। सर्दी-खांसी जैसी सामान्य बीमारी से राहत दिलाने के लिए बाज़ार में बिक रहे ‘कोल्ड्रिफ़ (Coldrif)’ नामक कफ सिरप ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई मासूमों की जान ले ली है, जिससे पूरे देश की दवा नियंत्रण प्रणाली पर एक गहरा संकट खड़ा हो गया है। विभिन्न स्रोतों की जाँच रिपोर्टों से पता चला है कि इस सिरप में भारी मात्रा में एक ज़हरीला औद्योगिक केमिकल मिला हुआ था।

मासूमों की मौत और ज़हरीला खुलासामध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, गुना और शिवपुरी जैसे ज़िलों में मासूम बच्चों की लगातार मौतें होने के बाद यह भयावह मामला सामने आया। राजस्थान पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ कि बच्चों को दी जा रही कोल्ड्रिफ कफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol – DEG) नामक अत्यंत खतरनाक केमिकल मौजूद था, जो सीधे किडनी फेलियर का कारण बनता है। यह केमिकल इंसानों के लिए जानलेवा है। आजतक की एक रिपोर्ट में बताया गया कि इस सिरप में DEG की मात्रा 48.6 प्रतिशत तक पाई गई, जो अनुमेय सीमा से कई गुना अधिक है।

मौतों का आंकड़ा और प्रभावित राज्य

मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों में मासूमों के माता-पिता गहरे सदमे में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक अकेले मध्य प्रदेश में इस सिरप के कारण 21 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि नागपुर के अस्पतालों में अभी भी कई बच्चे गंभीर हालत में भर्ती हैं। वहीं, आजतक और द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान में भी 2 से 3 बच्चों की मौत इस जहरीले सिरप के सेवन से जुड़ी हुई है। राजस्थान में बच्चों के बीमार पड़ने और कुछ की मौत होने की पुष्टि कई प्रतिष्ठित समाचार स्रोतों ने की है।

कंपनी की अमानवीय लापरवाही

यह ‘किलर सिरप’ तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स (Sresan Pharmaceuticals) द्वारा बनाया गया था। राजस्थान पत्रिका ने तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि कंपनी ने न सिर्फ़ बिना किसी सरकारी मान्यता प्राप्त लैब टेस्ट के सिरप बनाया, बल्कि 14 सालों से बिना गुणवत्ता मानकों के उत्पादन कर रही थी। कंपनी की फैक्ट्री में चारों ओर गंदगी थी, और रिपोर्ट में कुल 350 गंभीर लापरवाहियां उजागर हुईं।

इस त्रासदी के सामने आने के बाद सरकारों और एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई की है:

देशव्यापी प्रतिबंध: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस सिरप के उत्पादन और बिक्री पर देशभर में रोक लगा दी।केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय और CDSCO के अधिकारियों को मिलाकर 12 सदस्यीय जांच समिति गठित की है। मध्य प्रदेश में इस सिरप को लिखने वाले डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया और कंपनी के मालिकों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई है।

राजस्थान में एक्शन: आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में बच्चों की मौतों से जुड़ी खबरों के बाद, राज्य सरकार ने तुरंत ड्रग कंट्रोलर को निलंबित किया और Coldrif सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जो इसे दवा सुरक्षा में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मान रहा है।

यह घटना भारत की दवा नियंत्रण प्रणाली की कमियों को उजागर करती है और एक बार फिर ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहे जाने वाले देश की दवा गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब ज़रूरी है कि जांच पूरी हो, दोषियों को सज़ा मिले और पीड़ित परिवारों को न्याय मिले।

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