रोझौही न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के विरोध में फिर कमिश्नर कार्यालय पहुंचे नागरिक, 12 अक्टूबर के ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप

Spread the love

रीवा। सिरमौर तहसील के ग्राम रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को लेकर विरोध का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व में सौंपे गए ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए 3 नवंबर 2026 को सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने एक बार फिर संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर आयुक्त के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन डिप्टी कमिश्नर राजस्व लोचन लाल अहिरवार को दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि ग्रामीणों की आपत्तियों, ग्रामसभा के प्रस्तावों और कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी भूमि आवंटन एवं बोर लॉगिंग की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

12 अक्टूबर के ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी

प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इससे पहले 12 अक्टूबर 2026 को भी संभागायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर ग्रामीणों की आपत्तियों से प्रशासन को अवगत कराया गया था। लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई सामने नहीं आने के कारण 3 नवंबर को दोबारा ज्ञापन देना पड़ा। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को केवल औपचारिक शिकायत मानकर न छोड़ा जाए, बल्कि स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

ग्रामसभा के प्रस्तावों को बनाया विरोध का आधार

ज्ञापन में ग्राम पंचायत सरई कला के अंतर्गत आने वाले रोझौही गांव की ग्रामसभाओं के प्रस्तावों का उल्लेख किया गया है। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, 3 सितंबर 2026 की विशेष ग्रामसभा में उपस्थित लोगों ने प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी भू-तकनीकी जांच और बोरहोल की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया था।वहीं, 6 अक्टूबर 2026 की ग्रामसभा में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के पक्ष में लगभग 57 किता भूमि, जिसका कुल रकबा 210.8900 हेक्टेयर बताया गया है, के आवंटन का विरोध किया गया। ज्ञापन में दावा किया गया है कि ग्रामीणों ने भूमि आवंटन के संबंध में अनापत्ति देने से इनकार किया था।

पत्र क्रमांक 170/2026 को लेकर उठाए सवाल

मामले में एक कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि सरपंच ग्राम पंचायत सरई कला के नाम से पत्र क्रमांक 170/2026 जारी कर बोरहोल की अनुमति दर्शाई गई।ज्ञापन के अनुसार, सरपंच श्रीमती कोमल संजय सिंह ने पत्र क्रमांक 56/2026, दिनांक 8 अक्टूबर 2026 के माध्यम से उक्त अनापत्ति प्रमाण पत्र को अस्वीकार किया था। नागरिकों ने पूरे मामले की दस्तावेजी जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, इस कथित फर्जीवाड़े की आधिकारिक जांच और निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

पर्यावरण, स्वास्थ्य और विस्थापन को लेकर चिंता

प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित न्यूक्लियर परियोजना को लेकर जल, जमीन, वायु, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में रेडिएशन, कैंसर, ल्यूकेमिया जैसी बीमारियों की आशंका तथा संभावित विस्थापन का उल्लेख करते हुए व्यापक पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी अध्ययन की मांग की गई है।नागरिकों का कहना है कि परियोजना का प्रभाव केवल रोझौही गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली आबादी भी इससे जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर चिंतित है। हालांकि, विकिरण के वास्तविक प्रभाव क्षेत्र और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का निर्धारण वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन के आधार पर ही किया जा सकता है।

भूमि आवंटन और बोर लॉगिंग प्रक्रिया निरस्त करने की मांग

ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि ग्रामसभा के प्रस्तावों और ग्रामीणों की आपत्तियों का विधिसम्मत परीक्षण कराया जाए। कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र की जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक भूमि आवंटन और बोर लॉगिंग से जुड़ी प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।

ज्ञापन सौंपने वालों में ये रहे शामिल

3 नवंबर को संभागायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता सुरेंद्र पांडेय, समाजसेवी अनिल सिंह उपकारी सहित अन्य स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रामीणों की आपत्तियों और मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

रोझौही न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के विरोध में रीवा कमिश्नर कार्यालय में ज्ञापन सौंपते सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण प्रतिनिधि

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *