रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ ‘डेरा डालो–घेरा डालो’ आंदोलन जारी, ग्रामीणों के सवालों के बीच मृत्युंजय ‘मुन्ना’ खैरा ने उठाई आवाज

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खबर वन न्यूज़ | रीवा ग्राउंड ज़ीरो | 28 अक्टूबर 2026

रीवा। रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध का मुद्दा 28 अक्टूबर को भी चर्चा के केंद्र में है। 24 अक्टूबर से शुरू हुए कांग्रेस के ‘डेरा डालो–घेरा डालो’ आंदोलन के बीच ग्रामीणों की जमीन, पर्यावरण, जनस्वास्थ्य, ग्रामसभा की भूमिका और परियोजना से जुड़े सवाल लगातार उठाए जा रहे हैं।आंदोलन के माध्यम से क्षेत्रवासियों की चिंताओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों के लिए यह सवाल केवल बिजली परियोजना तक सीमित नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, भूमि अधिकारों और आने वाले समय में क्षेत्र के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।

मृत्युंजय ‘मुन्ना’ खैरा ने उठाए जनहित के सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता एवं जिला पंचायत सदस्य, वार्ड क्रमांक 16, मृत्युंजय ‘मुन्ना’ खैरा का कहना है कि रोझौही और आसपास के गांवों से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय लोगों की बात सुनी जानी चाहिए। प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्रामीणों के मन में जो सवाल और आशंकाएं हैं, उनका समाधान स्पष्ट जानकारी और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर होना जरूरी है।खैरा के अनुसार, जमीन, पर्यावरण, पानी, स्वास्थ्य और ग्रामसभा से जुड़े विषयों पर पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों को परियोजना की वास्तविक स्थिति, भूमि संबंधी प्रक्रिया और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे तथ्यों के आधार पर अपनी बात रख सकें।

आंदोलन के केंद्र में जमीन, पर्यावरण और ग्रामीणों का भविष्य

रोझौही में प्रस्तावित परमाणु विद्युत परियोजना को लेकर ग्रामीणों की प्रमुख चिंताओं में कृषि भूमि, जल संसाधन, पर्यावरणीय प्रभाव और जनस्वास्थ्य शामिल हैं। इसके साथ ही ग्रामसभा की भूमिका और भूमि संबंधी प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।स्थानीय लोगों की मांग है कि परियोजना से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से सुनवाई हो। भूमि अभिलेखों, वन अधिकार पट्टों और संबंधित अनुमतियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना भी इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।परमाणु ऊर्जा परियोजना के संभावित लाभों और स्थानीय स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन अलग-अलग पहलुओं से किया जाना चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिक तथ्यों, आधिकारिक दस्तावेजों और प्रभावित लोगों की चिंताओं को महत्व देना आवश्यक है।

स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों की सहभागिता

इस आंदोलन और रोझौही के मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मृत्युंजय ‘मुन्ना’ खैरा, वरिष्ठ नेता चक्रधर सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण पाण्डेय, कांग्रेस नेता रामराज कोरी, मुन्नू मिश्रा और अरविन्द पाण्डेय ‘बिंदू’ सहित सरई–रोझौही क्षेत्र के ग्रामीणों के नाम सामने आए हैं।आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य प्रस्तावित परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताओं को सामने रखना और प्रशासन से जवाब मांगना बताया गया है।

अब प्रशासन के जवाब पर टिकी निगाहें

28 अक्टूबर को इस मुद्दे पर सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही हैं कि प्रस्तावित स्थल की वास्तविक भूमि स्थिति क्या है, संबंधित वन अधिकार पट्टों का परियोजना से क्या संबंध है, ग्रामसभा की प्रक्रिया किस चरण में है और सुरक्षा एवं पर्यावरणीय आकलन को लेकर कौन-सी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है।इन सवालों का समाधान दस्तावेजों और संबंधित विभागों के स्पष्ट पक्ष से ही हो सकेगा। ग्रामीणों की चिंताओं पर संवाद और पारदर्शिता इस विवाद को आगे बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। रोझौही की आवाज अब स्पष्ट जवाब चाहती है—परियोजना से जुड़े तथ्यों को सामने लाया जाए, ग्रामीणों की आपत्तियों को सुना जाए और क्षेत्र के भविष्य से जुड़े फैसलों में जनहित को उचित महत्व दिया जाए।

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