मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित जनप्रतिनिधियों, परिजनों और विधानसभा परिवार ने अर्पित किए श्रद्धासुमन; एक ऐसी राजनीतिक यात्रा को नमन, जिसकी छाप आज भी विंध्य की स्मृतियों में कायम है
भोपाल। कुछ नाम केवल इतिहास की किताबों में दर्ज नहीं होते, वे लोगों की स्मृतियों में बस जाते हैं। स्वर्गीय श्रीनिवास तिवारी भी ऐसा ही एक नाम हैं। उनकी जयंती पर मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर में जब उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए, तो यह महज एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि उस लंबे सार्वजनिक जीवन का स्मरण था, जिससे विंध्य की राजनीति का एक बड़ा दौर जुड़ा रहा।विधानसभा परिसर में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधायक भगवानदास सबनानी, पूर्व विधायक पी.सी. शर्मा सहित जनप्रतिनिधियों, श्रीनिवास तिवारी के परिजनों तथा विधानसभा के अधिकारियों-कर्मचारियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।उनका स्मरण होते ही विंध्य की राजनीति का वह दौर आंखों के सामने आ जाता है, जब रीवा और पूरा विंध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराता था। श्रीनिवास तिवारी ने इसी धरती से निकलकर सार्वजनिक जीवन की लंबी यात्रा तय की और विधानसभा के अध्यक्ष पद तक पहुंचे।
विंध्य की मिट्टी से निकला वह नाम, जो विधानसभा तक पहुंचा
17 सितंबर 1926 को रीवा जिले के तिवनी में जन्मे श्रीनिवास तिवारी का सार्वजनिक जीवन संघर्ष और सक्रियता से भरा रहा। विद्यार्थी जीवन से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े। विंध्य प्रदेश के दौर से शुरू हुई उनकी राजनीतिक यात्रा आगे चलकर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान बनाती चली गई।वर्ष 1952 में वे विंध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में उनकी सक्रियता लगातार बनी रही। मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने से लेकर विधानसभा के उपाध्यक्ष और फिर अध्यक्ष तक पहुंचना उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से याद किया जाता है। सदन की कार्यवाही और संसदीय परंपराओं से उनका गहरा जुड़ाव रहा।
सिर्फ पद नहीं, एक पूरा दौर थे श्रीनिवास तिवारी
श्रीनिवास तिवारी को याद करना विंध्य की राजनीति के एक पूरे दौर को याद करना भी है।उनके समर्थकों के लिए वे अपने क्षेत्र की आवाज थे, उनके साथ राजनीति करने वालों के लिए लंबे अनुभव वाले राजनेता और विधानसभा के लिए एक ऐसे अध्यक्ष, जिनका सार्वजनिक जीवन दशकों तक सदन से जुड़ा रहा।समय बदलता गया, राजनीतिक परिस्थितियां बदलती गईं, चेहरे बदलते गए, लेकिन श्रीनिवास तिवारी का नाम विंध्य की राजनीतिक स्मृति से कभी अलग नहीं हुआ।यही कारण है कि उनकी जयंती केवल भोपाल के विधानसभा परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम भर नहीं रह जाती। रीवा-विंध्य में उनके नाम के साथ जुड़ी स्मृतियां आज भी लोगों की बातचीत का हिस्सा हैं।
आज भी याद आती है वह बुलंद राजनीतिक आवाज
विंध्य की राजनीति को करीब से देखने और समझने वालों के लिए श्रीनिवास तिवारी का व्यक्तित्व केवल किसी पद की पहचान नहीं था। उनकी अपनी राजनीतिक शैली थी, अपनी भाषा थी और जनता के बीच अपनी अलग पकड़ थी।उन्होंने सार्वजनिक जीवन में लंबा समय बिताया। इस दौरान कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उनकी पहचान लगातार बनी रही।एक पत्रकार के तौर पर जब हम पीछे मुड़कर विंध्य की राजनीतिक यात्रा को देखते हैं तो श्रीनिवास तिवारी जैसे व्यक्तित्व केवल एक खबर या एक तस्वीर बनकर सामने नहीं आते। वे उस दौर की पूरी राजनीतिक कहानी का हिस्सा बनकर सामने आते हैं।
विधानसभा में श्रद्धांजलि, विंध्य की स्मृतियों में अपनापन
जयंती के अवसर पर विधानसभा परिसर में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित उपस्थित जनप्रतिनिधियों और परिजनों ने उन्हें याद किया।विधानसभा के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में उनके सार्वजनिक जीवन, लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं में योगदान का स्मरण किया गया।लेकिन तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है—वह अपनापन, जो किसी नेता को पद से हटकर जनता की स्मृति में जगह देता है।श्रीनिवास तिवारी के लिए विंध्य में यही अपनापन आज भी दिखाई देता है।
मेरी कलम से विनम्र श्रद्धांजलि
मेरे लिए भी श्रीनिवास तिवारी केवल मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नहीं हैं। वे विंध्य की उस राजनीतिक विरासत का नाम हैं, जिसे हमने अपने वरिष्ठों से सुना, लोगों की बातचीत में जाना और इस क्षेत्र की राजनीतिक चेतना में महसूस किया। पत्रकारिता में हम रोज खबरें लिखते हैं। कुछ खबरें अगले दिन पुरानी हो जाती हैं, लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिन पर लिखते हुए लगता है कि हम केवल खबर नहीं लिख रहे, बल्कि अपने ही समय और अपनी ही मिट्टी के एक अध्याय को शब्द दे रहे हैं। श्रीनिवास तिवारी उन्हीं नामों में से एक हैं। उनकी जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।विंध्य की धरती से निकले इस वरिष्ठ राजनेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को मेरी कलम की ओर से भी विनम्र श्रद्धांजलि।

