उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के सख्त रुख के बीच डॉक्टर की सेवा समाप्त, औषधि निरीक्षक निलंबित; अथर्व ब्लड सेंटर पर आपराधिक प्रकरण के निर्देश
रीवा। गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद उठे सवालों के बीच उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कार्रवाई को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। उनका दो टूक संदेश—“सब मिलकर रोकेंगे, तब भी मैं नहीं रुकूंगा…”—ऐसे समय आया है, जब स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में शासन स्तर से बुधवार को बड़ी कार्रवाई सामने आई।एक ओर श्याम शाह मेडिकल कॉलेज की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं समाप्त की गई हैं, तो दूसरी ओर कल्पना मिश्रा मौत प्रकरण में जिला औषधि निरीक्षक राधेश्याम बट्टी को निलंबित कर दिया गया है। इसी मामले में अथर्व ब्लड सेंटर के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
राजेंद्र शुक्ल के रुख के बाद कार्रवाई का संदेश साफ
कल्पना मिश्रा प्रकरण को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अब अस्पताल की व्यवस्थाओं से आगे बढ़कर औषधि प्रशासन और ब्लड सेंटर तक पहुंच चुकी है।उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कार्रवाई को लेकर स्पष्ट संकेत दिया है कि जांच में जिम्मेदारी सामने आने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे। उनका बयान—“सब मिलकर रोकेंगे, तब भी मैं नहीं रुकूंगा”—इसी कार्रवाई को जारी रखने के संदेश के तौर पर सामने आया है।बुधवार को जारी आदेशों ने इस रुख को प्रशासनिक कार्रवाई का रूप भी दिया है।
कल्पना मिश्रा मामले में औषधि निरीक्षक निलंबित
खाद्य एवं औषधि प्रशासन मध्यप्रदेश के 16 सितंबर के आदेश के अनुसार राधेश्याम बट्टी, जिला औषधि निरीक्षक रीवा, को निलंबित किया गया है।आदेश में उनके खिलाफ कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता का उल्लेख किया गया है। विभाग के अनुसार अथर्व ब्लड सेंटर जिस क्षेत्र में संचालित था, वह उनके अधिकार क्षेत्र में आता था।निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उपसंचालक कार्यालय, शहडोल निर्धारित किया गया है।
अथर्व ब्लड सेंटर पर FIR के निर्देश
इसी प्रकरण में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक ने रीवा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं पदेन उपसंचालक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं।निर्देश के मुताबिक संबंधित औषधि निरीक्षक के माध्यम से अथर्व ब्लड सेंटर द्वारा की गई अनियमितताओं के संबंध में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाए और कार्रवाई से प्रशासन को अवगत कराया जाए।यहां यह स्पष्ट है कि FIR दर्ज कराने का निर्देश आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण नहीं है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और उसके बाद की न्यायिक प्रक्रिया में होगी।
डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं भी समाप्त
इसी दिन सामने आए दूसरे आदेश में श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।मरीजों को नर्सिंग होम जाने के लिए बाध्य करने संबंधी शिकायत की जांच वर्ष 2023 में चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने की थी। समिति की अनुशंसा के बाद नोटिस और स्पष्टीकरण सहित विभागीय प्रक्रिया पूरी की गई।कार्यकारिणी समिति के संकल्प के आधार पर 16 सितंबर 2026 को सेवा समाप्ति का आदेश जारी हुआ। आदेश के मुताबिक डॉ. अग्रवाल भविष्य में किसी भी शासकीय अथवा स्वशासी सेवा के लिए अनर्ह होंगी।
कल्पना मिश्रा प्रकरण में पहले ही हो चुकी कई कार्रवाई
इस मामले में इससे पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। डॉ. सोनल अग्रवाल, डॉ. निधि पांडेय, साधना वर्मा और सीमा मुजाल्दे के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई थी।संजय गांधी अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाया गया, जबकि तत्कालीन डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को सतना मेडिकल कॉलेज भेजा गया।अब औषधि निरीक्षक के निलंबन और ब्लड सेंटर के खिलाफ आपराधिक प्रकरण की प्रक्रिया ने कार्रवाई को एक और स्तर पर पहुंचा दिया है।
मजिस्ट्रियल जांच भी जारी
कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले में प्रशासनिक स्तर पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए हैं। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने जांच की जिम्मेदारी एसडीएम सिरमौर दृष्टि जायसवाल को सौंपी है।जांच में अस्पताल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर और संबंधित स्टाफ की भूमिका सहित निर्धारित बिंदुओं की पड़ताल की जानी है। जांच रिपोर्ट निर्धारित अवधि में प्रस्तुत की जानी है।
परिवार की मांग—निलंबन नहीं, आपराधिक जवाबदेही
मृतका के पिता रामशिरोमणि मिश्रा लगातार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि विभागीय कार्रवाई के साथ यह भी तय होना चाहिए कि उनकी बेटी और नवजात की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है।इसी मांग को लेकर वे अनशन पर भी बैठे हैं। मामले को लेकर कांग्रेस और विपक्ष की ओर से भी सरकार पर सवाल उठाए गए हैं।
अब आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के सख्त बयान के बीच बुधवार को हुई कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि कल्पना मिश्रा प्रकरण अभी प्रशासनिक कार्रवाई के अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है।डॉक्टरों पर कार्रवाई से शुरू हुआ मामला अब औषधि प्रशासन और ब्लड सेंटर तक पहुंच चुका है। आगे जांच रिपोर्ट क्या निष्कर्ष देती है और आपराधिक प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में जाती है—अब पूरे मामले की अगली तस्वीर इन्हीं कदमों से साफ होगी।
