रीवा | 27 अक्टूबर 2026 | REWA GROUND ZEROरीवा। जिले के रोझौही–सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का जल सत्याग्रह और धरना-प्रदर्शन जारी रहने के बीच क्योटी पंचायत भवन के सामने प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक फांसी लगाकर विरोध जताया। आंदोलन को कांग्रेस सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने से मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि सरकार प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को वापस लेने की आधिकारिक घोषणा करे। वहीं, ग्रामीण जल, जंगल, जमीन और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं।
स्वास्थ्य बिगड़ने पर प्रमोद शर्मा सहित चार लोग अस्पताल में भर्ती
आंदोलन के दौरान 26 अक्टूबर की रात जल सत्याग्रह और अनशन कर रहे कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई। इसके बाद नायब तहसीलदार सिरमौर बिंदु तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता प्रमोद शर्मा तथा ग्रामीण बबली कोल, रावेंद्र कोल और संदीप कोल को एंबुलेंस के माध्यम से रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया।प्रशासन की इस कार्रवाई के बीच आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि परियोजना को लेकर उनकी मूल मांग अब भी कायम है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना वापस लिए जाने की आधिकारिक घोषणा होने तक विरोध जारी रहेगा।
अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान
27 अक्टूबर को भी परियोजना स्थल के समीप स्थित तालाब में ग्रामीणों का जल सत्याग्रह जारी रहने की जानकारी सामने आई। आंदोलन में महिलाएं और पुरुष शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन से उनकी चिंताएं समाप्त नहीं होंगी। वे परियोजना को वापस लेने के संबंध में सरकार से आधिकारिक निर्णय चाहते हैं। ऐसे में प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
कांग्रेस का धरना जारी, उमंग सिंघार ने भी किया था दौरा
रोझौही–सरई कला क्षेत्र में 24 अक्टूबर से कांग्रेस के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन जारी है। इसमें स्थानीय कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी बनी हुई है।25 अक्टूबर को मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रोझौही पहुंचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने परियोजना वापस लिए जाने तक कांग्रेस का धरना जारी रखने की बात कही थी। 27 अक्टूबर को भी कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन जारी रहने की जानकारी है।कांग्रेस की सक्रियता के साथ ही परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हुई हैं। हालांकि, परियोजना के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित विभागों की आधिकारिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों की भागीदारी
क्योटी पंचायत भवन के सामने हुए विरोध प्रदर्शन में बिरसा मुंडा विचार क्रांति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुकांत कुशवाहा, सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, नागरिक आनंद कोल और समाजसेवी बृजेश गौतम सहित सैकड़ों ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी बताई गई।प्रदर्शनकारियों ने परियोजना को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए ग्रामीणों के हितों, पर्यावरण और भविष्य से जुड़े सवाल उठाए। आंदोलन को मिल रहे विभिन्न संगठनों के समर्थन के बीच रोझौही का मुद्दा अब स्थानीय जनआंदोलन के साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।
अब आगे क्या?
रोझौही में जारी आंदोलन के बीच तीन सवाल अहम बने हुए हैं—क्या सरकार परियोजना पर पुनर्विचार करेगी, क्या ग्रामीणों की आपत्तियों पर स्पष्ट जवाब दिया जाएगा और क्या प्रशासन आंदोलनकारियों के साथ बातचीत के जरिए कोई समाधान निकाल पाएगा?फिलहाल, ग्रामीणों का विरोध और कांग्रेस का धरना जारी रहने की जानकारी है। परियोजना को लेकर सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि होने तक स्थिति पर नजर बनी रहेगी।
