ड्यूटी के दौरान मरीज को कैनुला लगा रही थीं शालू शुक्ला, पीछे से आए अटेंडर ने मारी लात; चोट के बाद सर्जरी विभाग में भर्ती
रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर के साथ मारपीट की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है। सोमवार रात आकस्मिक चिकित्सा विभाग में नाइट ड्यूटी कर रहीं नर्सिंग ऑफिसर शालू शुक्ला के साथ मरीज के परिजन द्वारा कथित तौर पर मारपीट किए जाने की जानकारी सामने आई है। घटना में नर्सिंग ऑफिसर के पेट और कमर में चोट आने के बाद उन्हें अस्पताल के सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया है।
मरीज का उपचार कर रही थीं, पीछे से हुआ हमला
बताया गया कि सोमवार रात करीब 10 बजे शालू शुक्ला आकस्मिक चिकित्सा विभाग में ड्यूटी पर थीं। वह एक मरीज को IV कैनुला लगाने की प्रक्रिया में जुटी थीं। इसी दौरान मरीज के साथ मौजूद एक व्यक्ति ने कथित रूप से पीछे से उनके साथ मारपीट की। अचानक हुए हमले से नर्सिंग ऑफिसर संतुलन खो बैठीं और मुंह के बल नीचे गिर गईं।घटना के बाद उनके पेट और कमर में गंभीर चोट की शिकायत सामने आई। चिकित्सकीय उपचार के लिए उन्हें सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया है।
‘कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग ले’
घटना के बाद नर्सिंग स्टाफ में नाराजगी है। घायल नर्सिंग ऑफिसर शालू शुक्ला ने कहा कि अस्पताल में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर विभाग को स्पष्ट जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। उनका कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के उपचार और सेवा में पूरी जिम्मेदारी से काम करते हैं, ऐसे में ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी विभाग की जिम्मेदारी है।
नर्सिंग एसोसिएशन ने प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन
घटना के विरोध में नर्सेज एसोसिएशन ने अस्पताल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर कथित आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने 48 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लेने की मांग रखी है।एसोसिएशन का कहना है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती और अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा।
स्टाफ की कमी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों का दबाव लगातार बना रहता है, जबकि उसके अनुपात में स्टाफ की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। इसके बावजूद कर्मचारी दिन-रात मरीजों की देखभाल में जुटे रहते हैं। ऐसे वातावरण में यदि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ ही मारपीट की घटनाएं होने लगें तो अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।नर्सिंग संगठन ने इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन और विभागीय अधिकारियों से कर्मचारियों के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा है कि अस्पताल में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए, ताकि वे बिना दबाव मरीजों का उपचार कर सकें। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नर्सिंग ऑफिसर से कथित मारपीट के मामले में पुलिस और अस्पताल प्रबंधन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
