गुजरात में रीवा के दो युवकों को बंधक बनाने का आरोप, परिजनों ने कलेक्टर से लगाई गुहार

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जवा के सुअरहा गांव के सच्चिदानंद उपाध्याय और निलेश तिवारी को लेकर परिजनों की चिंता बढ़ी, कंपनी संचालक और मैनेजर पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप

रीवा। जिले के जवा क्षेत्र से रोजगार के सिलसिले में गुजरात पहुंचे दो युवकों को कथित रूप से बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। मामला गुजरात के गांधीनगर स्थित एक कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है। जवा क्षेत्र के ग्राम सुअरहा निवासी सच्चिदानंद उपाध्याय और निलेश तिवारी के परिजनों ने रीवा कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर दोनों युवकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।परिजनों ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि गांधीनगर स्थित संबंधित कंपनी के मालिक और मैनेजर द्वारा दोनों युवकों के साथ मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका दावा है कि युवकों को अपनी इच्छा से बाहर आने या वापस घर लौटने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से परिवार के लोगों में भय और बेचैनी का माहौल है।

घर से दूर गए, अब सुरक्षा को लेकर परिवार परेशान

बताया गया कि दोनों युवक रोजगार के उद्देश्य से गुजरात गए थे। परिवार को उम्मीद थी कि वे वहां काम करके अपने भविष्य को बेहतर बनाएंगे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि परिजनों को उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन का दरवाजा खटखटाना पड़ा।परिजनों का आरोप है कि कंपनी में दोनों युवकों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो युवकों के साथ कोई गंभीर घटना हो सकती है।

कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

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मामले को लेकर परिजनों ने रीवा कलेक्टर को लिखित आवेदन देकर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार चाहता है कि गुजरात प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों के माध्यम से दोनों युवकों की सुरक्षित स्थिति की जानकारी जुटाई जाए और यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

आरोपों की जांच और युवकों की सुरक्षा अहम

गुजरात में कथित रूप से रोके गए रीवा के दो युवकों को लेकर परिजनों की शिकायत
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यह पूरा मामला फिलहाल परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके प्रशासन को दिए आवेदन पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित कंपनी संचालक अथवा प्रबंधन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। हालांकि, मामला दो युवकों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग ने गंभीरता बढ़ा दी है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गांधीनगर में दोनों युवक किस परिस्थिति में हैं, क्या उन्हें वास्तव में उनकी इच्छा के विरुद्ध रोका गया है और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है?परिजनों की गुहार के बाद अब निगाहें रीवा प्रशासन की कार्रवाई और गुजरात पुलिस की भूमिका पर टिकी हैं। दो परिवार अपने बेटों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

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