गर्भवती महिलाओं के पंजीयन से लेकर हाई-रिस्क केस की निगरानी तक कसा शिकंजा, मातृ-शिशु मृत्यु की हर घटना की होगी गहन समीक्षा
रीवा। स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति को लेकर जिला पंचायत सीईओ सृष्टि देशमुख गौड़ा ने अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक संदेश दिया है—स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में उन्होंने गर्भवती महिलाओं के पंजीयन, नियमित स्वास्थ्य जांच, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग और ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा एंट्री की स्थिति की बारीकी से समीक्षा की।बैठक में सीईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले की हर गर्भवती महिला का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। गर्भावस्था के दौरान निर्धारित कम से कम चार स्वास्थ्य जांचें समय पर हों और जांच के दौरान एनीमिया अथवा उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर स्थिति सामने आने पर संबंधित महिला को तत्काल चिन्हित कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए। गंभीर मामलों में जिला अस्पताल में भर्ती कर बेहतर चिकित्सा सुविधा देने पर भी जोर दिया गया।
9 और 25 तारीख को जांच से नहीं छूटेगा हाई-रिस्क मामला
हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी को लेकर भी सीईओ ने स्वास्थ्य अमले को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को आयोजित होने वाले विशेष स्वास्थ्य शिविरों में गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य जांच कराई जाए।महज पंजीयन तक जिम्मेदारी सीमित न रहे, बल्कि पंजीयन से लेकर जांच, चिन्हांकन, उपचार और फॉलोअप तक की पूरी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज की जाए। डेटा एंट्री में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए।
मातृ और शिशु मृत्यु पर होगी गहराई से पड़ताल
समीक्षा बैठक में सबसे गंभीर मुद्दा मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु का रहा। सीईओ ने निर्देश दिए कि जिले में होने वाली प्रत्येक मातृ एवं शिशु मृत्यु की निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार विस्तृत समीक्षा की जाए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले की जांच केवल औपचारिकता न बने, बल्कि यह देखा जाए कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे और स्वास्थ्य व्यवस्था के स्तर पर कहीं कोई चूक तो नहीं हुई। जांच के बाद तैयार विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की बात भी स्पष्ट रूप से कही गई।
ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सूचकांकों की होगी नियमित समीक्षा
सीईओ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा डीपीएम को निर्देशित किया कि ब्लॉक स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित कर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रमुख सूचकांकों की समीक्षा की जाए। जिन क्षेत्रों में प्रदर्शन अपेक्षित स्तर पर नहीं है, वहां कमियों को चिन्हित कर सुधार की ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।बैठक में पोषण पुनर्वास केंद्रों में कुपोषित बच्चों की भर्ती, टीकाकरण, दस्तक अभियान, संचारी रोगों से बचाव और क्षय मुक्त भारत अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई।स्वास्थ्य विभाग की इस समीक्षा बैठक का संदेश साफ रहा—कागजों में लक्ष्य पूरा दिखाने से काम नहीं चलेगा, स्वास्थ्य सेवाओं का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं और नवजातों से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में डीपीएम ज्ञानेंद्र मिश्रा, जिले के समस्त बीएमओ, बीपीएम तथा संबंधित नोडल अधिकारी मौजूद रहे।
