नहलादा में प्रतिमा विसर्जन के दौरान पांच युवक डूबे थे, विश्वास और लक्ष्य की मौत से परिवार में पसरा मातम; एसडीआरएफ और विशेषज्ञ गोताखोरों ने चलाया लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन
खंडवा। गणेश प्रतिमा के विसर्जन की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब ग्राम नहलादा में गिट्टी खदान से बने गहरे गड्ढे में पांच युवक डूब गए। हादसे के बाद शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन करीब छह घंटे तक चलता रहा। आखिरकार भाजपा नेता मोंटू ठाकुर के दोनों बेटों विश्वास और लक्ष्य के शव पानी से बाहर निकाले जा सके। दोनों शव मिलने के बाद घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बीच चीख-पुकार मच गई।हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और बचाव अभियान शुरू किया। गहराई अधिक होने के कारण शुरुआती रेस्क्यू में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने मौके पर गोताखोरों की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर नाराजगी भी जताई। इसके बाद ओंकारेश्वर से विशेषज्ञ गोताखोरों को बुलाया गया, जिसके बाद तलाशी अभियान को आगे बढ़ाया गया।लगातार कई घंटे तक चले अभियान के बाद दोनों युवकों के शव बरामद हुए। शवों को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां शनिवार को पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया।
छह घंटे तक घटनास्थल पर डटी रहीं विधायक
हादसे की गंभीरता को देखते हुए खंडवा विधायक कंचन मुकेश तनवे भी लगातार घटनास्थल पर मौजूद रहीं। रेस्क्यू टीम के अभियान पर नजर रखने के साथ वे पीड़ित परिवार और ग्रामीणों के बीच बनी रहीं।जब बचाव दल ने दोनों बच्चों के शव पानी से बाहर निकाले तो माहौल अचानक बेहद भावुक हो गया। अपनों को खोने का दर्द सामने था और इस दृश्य ने मौके पर मौजूद लोगों को झकझोर दिया। विधायक भी खुद को भावुक होने से नहीं रोक सकीं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।विधायक कंचन मुकेश तनवे ने कहा कि एक मां होने के नाते वह बच्चों को खोने वाले परिवार के दर्द को समझ सकती हैं। उन्होंने कहा कि मोंटू ठाकुर के परिवार पर आई यह विपदा बेहद पीड़ादायक है और इस कठिन समय में पूरा समाज परिवार के साथ खड़ा है।
प्रशासन ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया
घटना को लेकर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने हादसे को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।गणेश उत्सव के दौरान सामने आई इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। जिस स्थान पर धार्मिक आस्था के साथ प्रतिमा विसर्जन के लिए लोग जुटे थे, वही जगह कुछ ही देर में दो परिवारों के लिए कभी न भरने वाला दुख छोड़ गई।
