सुप्रीम कोर्ट सख्त: अब नहीं दिखेंगे आवारा कुत्तों के झुंड, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा आदेश!

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देशभर में बढ़ती घटनाओं पर स्वतः संज्ञान, सभी राज्यों को 8 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश — लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों और मवेशियों के कारण हो रही दुर्घटनाओं व बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए “IN RE: CITY HOUNDED BY STRAYS, KIDS PAY PRICE” शीर्षक से Suo Moto Writ Petition (Civil) No. 5 of 2025 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। न्यायालय ने कहा कि यह अब केवल पशु नियंत्रण का नहीं, बल्कि “जन सुरक्षा का गंभीर प्रश्न” बन गया है।

तीन जजों की बेंच ने की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने की —

माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ,

माननीय न्यायमूर्ति संदीप मेहता,

माननीय न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया।
इस याचिका पर मुख्य आदेश 7 नवम्बर 2025 को पारित किया गया।

कोर्ट का आदेश: सार्वजनिक स्थलों से हटें आवारा पशु

न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि स्थानीय निकायों के सहयोग से

शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और खेल परिसरों सहित सभी सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को तत्काल पकड़ा जाए।

सभी पकड़े गए कुत्तों/मवेशियों की नसबंदी और टीकाकरण कर उन्हें केवल मान्यता प्राप्त शेल्टर होम या पाउंड में रखा जाए।

किसी भी परिस्थिति में पकड़े गए पशुओं को उसी स्थान पर दोबारा छोड़ा न जाए।

जनता की सुरक्षा सर्वोपरि, अधिकारियों की जवाबदेही तय

कोर्ट ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। नगर निगम और ग्राम पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है।

रिपोर्ट देनी होगी आठ हफ्ते में, देरी पर सख्त कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और नगर निगम अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे 8 सप्ताह के भीतर अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करें।
अनुपालन न होने पर संबंधित अधिकारी न्यायालय के प्रति व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है — सड़कें, स्कूल और अस्पताल इंसानों के लिए हैं, खतरे के लिए नहीं!

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