अअजमेर। अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे अक्सर सुनाई देते हैं, लेकिन शहर की हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर देती है। शहर की पहचान मानी जाने वाली आनासागर चौपाटी का पाथवे इन दिनों अंधेरे में डूबा हुआ है। वैशाली नगर पेट्रोल पंप के सामने स्थित मुख्य द्वार से लेकर सागर विहार के मुख्य प्रवेश तक पाठ वे स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। जिससे यहां घूमने आने वाले परिवारों और बुजुर्गों ने रात 8 बजे बाद इस मार्ग पर असुरक्षा होने के कारण घूमना बंद कर दिया।
अंधेरे का फायदा उठाकर कुछ युवक-युवतियां यहां सिगरेट और सूखा नशा करते दिखाई देते हैं, वहीं कई बार आपत्तिजनक गतिविधियां भी देखने को मिलती हैं। शराबी झील किनारे पैग लगाते दिख जायेंगे । परिवार के साथ आने वाले लोगों के लिए ऐसे दृश्य असहज स्थिति पैदा करते हैं और धीरे-धीरे लोग इस मार्ग से गुजरने से बचने लगे हैं। यह स्थिति शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल के लिए चिंता का विषय है। हैरानी की बात यह है कि जो दृश्य आम नागरिकों को साफ दिखाई दे रहे हैं, वे जिम्मेदार विभागों की नजरों से कैसे ओझल हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पाथवे के इसी हिस्से की लाइटें लंबे समय से बंद क्यों हैं ? यदि यह तकनीकी खराबी है तो उसकी मरम्मत तुरंत क्यों नहीं की जा रही, और यदि लापरवाही है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। स्मार्ट सिटी की योजनाओं के बीच शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल का अंधेरे में डूबा रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर कटाक्ष जैसा प्रतीत होता है।
आनासागर चौपाटी केवल स्थानीय नागरिकों के लिए ही नहीं बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। यदि यहां अंधेरा और अव्यवस्था बनी रहती है तो इसका सीधा असर अजमेर की छवि और पर्यटन पर पड़ सकता है। इसलिए आवश्यक है कि प्रशासन तुरंत इस स्थिति का संज्ञान ले। पाथवे की सभी बंद लाइटों को जल्द चालू कराया जाए, नियमित पुलिस गश्त और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई जाए तथा असामाजिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अजमेर की जनता को स्मार्ट सिटी के बड़े दावों से ज्यादा एक सुरक्षित और रोशन शहर चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस वास्तविक समस्या पर कितनी जल्दी कदम उठाता है और आनासागर चौपाटी को फिर से परिवारों और पर्यटकों के लिए सुरक्षित व सम्मानजनक स्थान बना पाता है या नहीं।

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