“खबर वन न्यूज़” का असर : बजरी माफिया पर सख्ती बिना GPS नहीं चलेगा खनिज परिवहन

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बिना GPS नहीं चलेगा वाहन, फर्जी रवन्ना और अवैध परिवहन पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

जयपुर | राजस्थान में खनिज परिवहन व्यवस्था में लंबे समय से चल रहे कथित “रवन्ना पर्ची खेल” पर अब सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राजस्थान के खान एवं पेट्रोलियम विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार अब खनिज परिवहन में लगे सभी वाहनों में GPS लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। 10 जून 2026 के बाद बिना GPS वाले वाहनों का ई-रवन्ना जनरेट नहीं होगा तथा ऐसे वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

खबर वन न्यूज” का खुलासा

महत्वपूर्ण बात यह है कि खनिज परिवहन में कथित गड़बड़ियों, फर्जी रवन्ना, रॉयल्टी चोरी और एक ही पर्ची पर कई बार खनिज परिवहन जैसे मामलों को लेकर सबसे पहले पाक्षिक समाचार पत्र “खबर वन न्यूज़ ” ने लगातार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर प्रशासन और सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था। इसके बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई और अब पूरी व्यवस्था को डिजिटल निगरानी प्रणाली से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

विभागीय आदेश में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, भरतपुर, कोटा और भीलवाड़ा सहित विभिन्न खनन क्षेत्रों के अधीक्षण खनि अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में 10 जून 2026 तक सभी खनिज परिवहन वाहनों में GPS लगाना सुनिश्चित करें।

आदेश के अनुसार 20 मई से 5 जून तक विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे, जिनमें खदान पट्टाधारकों, स्टॉकिस्ट, डीलरों और ट्रांसपोर्टरों को GPS इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि 10 जून के बाद यदि कोई वाहन बिना GPS के खनिज परिवहन करते पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी तथा ऐसे वाहनों के लिए ई-रवन्ना भी जारी नहीं होगा।

राजस्थान में इस नई व्यवस्था लागू होने के बाद खनिज वाहनों की लाइव लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि वाहन किस खदान से निकला, किस मार्ग से गया और निर्धारित स्थान तक पहुंचा या नहीं। इससे एक ही रवन्ना पर कई बार परिवहन, फर्जी पर्चियों के उपयोग और अवैध खनन सामग्री की ढुलाई पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

सूत्रों के अनुसार सरकार QR कोड आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू कर सकती है, जिससे आम जनता भी मोबाइल के माध्यम से ई-रवन्ना की वास्तविकता जांच सकेगी। वाहन नंबर और रवन्ना विवरण ऑनलाइन उपलब्ध होने पर परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

खनन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि GPS मॉनिटरिंग व्यवस्था को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ लागू किया गया तो राजस्थान में अवैध खनन और फर्जी परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। हालांकि इसके लिए विभागीय निगरानी, तकनीकी मॉनिटरिंग और सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी होगी।

फिलहाल सरकार के इस कदम को खनिज परिवहन व्यवस्था में बड़े डिजिटल सुधार के रूप में देखा जा रहा है। वहीं खबर वन न्यूज़ द्वारा लगातार उठाए मुद्दों के बाद प्रशासनिक सक्रियता बढ़ने को लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा बनी हुई है।

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