जयपुर: छात्रावास के नाम पर ज़मीन बाजार में बेची आवासन मंडल :भूखंड घोटाला

Spread the love

जयपुर | (मीडिया) राजधानी जयपुर के प्रताप नगर में सामने आया एक मामला सरकारी योजनाओं की आड़ में हुए कथित बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। राजस्थान आवासन मंडल (RHB) द्वारा सामाजिक उद्देश्य के लिए रियायती दर पर आवंटित भूखंड को नियमों के विरुद्ध बेचने का आरोप है, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

रियायत की जमीन, मुनाफे का सौदा

दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 2005 में सेक्टर 71/16 स्थित 189 वर्गमीटर का प्लॉट MKM इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट को करीब 11 लाख रुपये में रियायती दर पर दिया गया था।
यह जमीन विशेष रूप से अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की छात्राओं के लिए छात्रावास बनाने हेतु आवंटित की गई थी।

लेकिन आरोप है कि इस सामाजिक उद्देश्य को दरकिनार कर भूखंड को निजी लाभ के लिए बेच दिया गया, जो सीधे-सीधे आवंटन शर्तों का उल्लंघन है।

शर्तों को दरकिनार कर खेल

आवंटन की शर्तें साफ थीं—प्लॉट का उपयोग केवल छात्रावास निर्माण के लिए होगा

किसी अन्य व्यक्ति को बेचना या ट्रांसफर करना प्रतिबंधित था

इसके बावजूद, मौके पर अब आवासीय उपयोग दिखाई देना और किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे की बात, पूरे मामले को संदिग्ध बनाती है।

फाइलों में विरोध, जमीन पर बदलाव

सूत्र बताते हैं कि जब नामांतरण के लिए आवेदन किया गया तो
RHB स्तर पर इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए आपत्ति भी दर्ज की गई थी।
फिर सवाल उठता है कि—
👉 आपत्ति के बावजूद मामला आगे कैसे बढ़ा?


👉 क्या दबाव या मिलीभगत ने नियमों को दरकिनार किया?

दस्तावेजों से खुलती परतें

उपलब्ध दस्तावेजों में यह स्पष्ट है कि—

यह प्लॉट रियायती दर पर विशेष सामाजिक उद्देश्य के लिए दिया गया

आवंटन समिति की बैठक (25 नवंबर 2005) में भी बिक्री पर रोक का उल्लेख है। फिर भी, जमीन का उपयोग और स्वामित्व बदलना, नियमों की अनदेखी और संभावित सांठगांठ की ओर इशारा करता है।

इसे भी पढ़ें:-

सिस्टम पर सवाल

यह मामला सिर्फ एक प्लॉट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत देता है कि—क्या रियायती भूखंडों को कम कीमत पर लेकर बाजार में बेचने का ‘मॉडल’ बन चुका है?

क्या संबंधित विभागों में निगरानी की कमी या मिलीभगत है? यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो—भूखंड को सरकारी कब्जे में वापस लिया जा सकता है

संबंधित संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है

 सामाजिक हक पर सौदा

गरीब और पिछड़े वर्ग की छात्राओं के लिए आवंटित जमीन को मुनाफे के लिए बेचना, केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सामाजिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

👉 अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या इस ‘रियायती जमीन के खेल’ पर सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

सोर्स: राजगंगा DE (रिपोर्ट)

2 thoughts on “जयपुर: छात्रावास के नाम पर ज़मीन बाजार में बेची आवासन मंडल :भूखंड घोटाला

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *