Kota । होली के पावन पर्व के बाद आने वाली यमद्वितीया (दूज) के अवसर पर कायस्थ समाज द्वारा घर-घर भगवान का पूजन कर कलम-दवात पूजा की परंपरा श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई गई। समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर ज्ञान, लेखन और बुद्धि की कामना की।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा युवाशाखा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत सक्सेना ने बताया कि इस पर्व पर भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने का विशेष विधान है। कायस्थ समाज में हर वर्ष होली की यमद्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजन का पर्व बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि भगवान चित्रगुप्त को लेखन, ज्ञान और गणना का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वे प्रत्येक मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं और उसी के आधार पर न्याय होता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रदेश महासचिव हिरदेश सक्सेना ने कहा कि होली का पर्व जहां रंगों और खुशियों का प्रतीक है, वहीं दूज का दिन विशेष रूप से भगवान चित्रगुप्त की आराधना को समर्पित होता है। इस दिन कलम-दवात की पूजा कर विद्या, बुद्धि और सृजनात्मक क्षमता की वृद्धि की कामना की जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह परंपरा केवल किसी एक समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सनातन हिंदू समाज के लिए ज्ञान और कर्म की महत्ता को दर्शाने वाला पर्व है। समाज के लोगों ने अपने घरों में पूजा कर नई पीढ़ी को भी इस परंपरा से जोड़ने का संदेश दिया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने से व्यक्ति को विद्या, विवेक, लेखन कौशल और सकारात्मक कर्मों का आशीर्वाद प्राप्त होता है
