शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR दर्ज कर जांच पॉक्सो कोर्ट के आदेश

Spread the love

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)।
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य से जुड़े कथित नाबालिग शोषण प्रकरण ने राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी और धार्मिक हलकों में गंभीर चर्चा पैदा कर दी है। मामला तब न्यायालय पहुंचा जब शिकायतकर्ता संत आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया कि नाबालिग बच्चों के साथ कथित अनुचित व्यवहार की शिकायत पुलिस को देने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई।

प्राप्त न्यायालयीय जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने पुलिस कार्रवाई न होने पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत आवेदन प्रस्तुत कर मामले की न्यायिक जांच की मांग की। इस पर सुनवाई करते हुए ने प्रकरण को गंभीर मानते हुए कथित पीड़ित नाबालिगों को न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

दिनांक 13 फरवरी 2026 को न्यायालय में नाबालिग बच्चों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने बंद कक्ष (इन-कैमरा प्रक्रिया) में बयान लेने के बाद प्रस्तुत दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का अवलोकन किया। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपों की जांच आवश्यक मानते हुए संबंधित थाना पुलिस को POCSO अधिनियम एवं अन्य लागू धाराओं में FIR दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना शुरू करने का आदेश दिया।

न्यायालय के आदेश का उद्देश्य आरोपों की सत्यता की जांच कराना है, न कि किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना। भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार FIR दर्ज होना केवल जांच की शुरुआत मानी जाती है और अंतिम निर्णय साक्ष्यों व ट्रायल के बाद ही न्यायालय द्वारा किया जाता है।

अब आदेश के बाद संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस को मामला दर्ज कर पीड़ितों के बयान, साक्ष्य संग्रह, मेडिकल एवं अन्य जांच प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। जांच पूरी होने पर पुलिस चार्जशीट अथवा अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे सुनवाई चलेगी।

अब तक उपलब्ध आधिकारिक न्यायालयीय कार्यवाही और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट्स में इस मामले को यौन शोषण आरोपों से संबंधित बताया गया है। वर्तमान चरण में किसी प्रकार के आर्थिक गबन या धन संबंधी आरोप FIR आदेश का हिस्सा होने की पुष्टि नहीं हुई है।

इस पूरे प्रकरण में शंकराचार्य पक्ष की विस्तृत कानूनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने आना शेष है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार आरोपी पक्ष को उच्च न्यायालय में आदेश को चुनौती देने का अधिकार भी प्राप्त है।

प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा FIR दर्ज कर जांच कराने का आदेश दिए जाने के बाद मामला अब पूर्ण रूप से पुलिस विवेचना के अधीन है और अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *