नववर्ष 2026 की पूर्व संध्या पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने जश्न की परिभाषा ही बदल दी। जहां आमतौर पर नववर्ष का स्वागत शोर, नशे और दिखावे से किया जाता है, वहीं पार्षद ज्ञान सारस्वत ने समाज को एक नई दिशा देने वाला संदेश प्रस्तुत किया — “दारू छोड़ो, दूध पियो”।ज्ञान सारस्वत ने अपने साथियों के साथ शहर में दूध वितरण कर नववर्ष का स्वागत किया और युवाओं व आमजन से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की अपील की। यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक सशक्त और सकारात्मक संदेश थी कि उत्सव का अर्थ आत्मविनाश नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, स्वस्थ सोच और स्वस्थ समाज है।उनकी यह सोच दर्शाती है कि जनप्रतिनिधि केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज की मानसिकता बदलने की भी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। दूध वितरण के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि शक्ति, ऊर्जा और संस्कार नशे से नहीं, बल्कि सादगी और स्वास्थ्य से आते हैं।नववर्ष 2026 का यह स्वागत अजमेर के लिए मिसाल बन गया। यह संदेश विशेष रूप से युवाओं के लिए है कि वे गलत राह छोड़कर सही दिशा चुनें, अपने परिवार, समाज और देश के भविष्य को मजबूत करें।पार्षद ज्ञान सारस्वत की यह पहल प्रशंसा के योग्य ही नहीं, बल्कि अनुकरणीय भी है। यदि ऐसे संदेश हर गली-मोहल्ले तक पहुंचें, तो निश्चित ही आने वाली पीढ़ी नशामुक्त, संस्कारवान और सशक्त भारत का निर्माण करेगी।
