अब खैर नहीं ! कॉलोनियों को बाजार बनाने वालों पर सरकार का शिकंजा

Spread the love

सवाल तो यह है कि अफसरों की जवाबदेही कब तय होगी?

अजमेर/जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा आवासीय मकानों में नए व्यावसायिक लाइसेंसों पर रोक लगाने का फैसला उन लाखों परिवारों के लिए राहत की खबर बनकर आया है, जो वर्षों से अपनी ही कॉलोनियों में अव्यवस्था, अतिक्रमण और बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। सरकार ने भले ही अब नए लाइसेंसों पर रोक लगा दी हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह स्थिति बनी कैसे, जिसमें रहने के लिए बसाई गई कॉलोनियां धीरे-धीरे बाजारों में तब्दील होती चली गईं?

प्रदेश के कई शहरों में आवासन मंडल और विकास प्राधिकरणों की कॉलोनियों के मुख्य मार्गों पर रेस्टोरेंट, चाय की थड़ियां, कैफे, कोचिंग सेंटर, होटलनुमा प्रतिष्ठान और अन्य व्यवसायिक गतिविधियां इस कदर बढ़ गई हैं कि स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। देर रात तक चलने वाली गतिविधियां, वाहनों की भीड़, अवैध पार्किंग और बाहरी लोगों की आवाजाही ने महिलाओं, बच्चियों और बुजुर्गों की सुरक्षा व सुविधा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

वैशाली नगर: नियमों की अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण

अजमेर का वैशाली नगर क्षेत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। संतोषी माता मंदिर के सामने का क्षेत्र आज आवासीय कॉलोनी कम और व्यावसायिक कॉरिडोर अधिक दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रतिष्ठानों ने सड़क और सार्वजनिक भूमि तक को अपने उपयोग में ले लिया है।

शंकर डेयरी के सामने खाली भूमि पर नगर निगम द्वारा बनाई गई दीवार हटाकर वहां ग्राहकों के बैठने की व्यवस्था और वाहन पार्किंग विकसित कर दी गई, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने आंखें मूंदे रखीं। एमबी जूस सेंटर से लेकर मंगलम क्षेत्र तक बहुमंजिला व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ती गईं, लेकिन किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि इन निर्माणों और व्यवसायों को स्वीकृति किस आधार पर मिली।

दुकानदार दोषी या सिस्टम?

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि नियमों के विरुद्ध कॉलोनियों में व्यवसाय बढ़े, भवन बने और अतिक्रमण हुए, तो इसके लिए केवल व्यापारी जिम्मेदार हैं या फिर वे अधिकारी भी जिन्होंने वर्षों तक यह सब होते देखा?

जनता पूछ रही है कि आखिर आज तक किसी आवासन मंडल, विकास प्राधिकरण या नगर निगम अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो अनुमति देने वालों और निगरानी करने वालों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

सिर्फ आदेश नहीं, अब कार्रवाई चाहिए

सरकार का नया निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन केवल नए लाइसेंस रोक देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आवश्यकता उन सभी मामलों की जांच की है जहां आवासीय क्षेत्रों का स्वरूप बदलकर व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला। साथ ही अतिक्रमण हटाने, अवैध पार्किंग समाप्त करने और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी जरूरत है।

क्योंकि सवाल केवल दुकानों का नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों का है जो अपने घरों के बाहर फिर से सुरक्षित, अपना बेटी,बहु,परिवार के साथ व्यवस्थित और शांत वातावरण चाहते हैं।

संपादकीय डेस्क
खबर वन न्यूज”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *