नई दिल्ली । (एजेंसी) देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। 17 मार्च 2026 से प्रभावी हुए इन नए नियमों के तहत टोल भुगतान में लापरवाही करने वाले वाहन चालकों के लिए अब सख्त और तकनीक-आधारित व्यवस्था लागू हो गई है।
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी वाहन का टोल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम (ETC) में दर्ज हो जाता है लेकिन शुल्क जमा नहीं होता, तो उसे “बकाया उपयोगकर्ता शुल्क” माना जाएगा। इसके लिए अब वाहन मालिकों को सीधे ई-नोटिस भेजे जाएंगे, जिनमें यात्रा का स्थान, तारीख और बकाया राशि की पूरी जानकारी होगी। यह सूचना SMS, ईमेल या मोबाइल ऐप के जरिए दी जाएगी और एक ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।
सरकार ने इस प्रणाली को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (NETC) को वाहन डेटाबेस से जोड़ने का प्रावधान किया है, जिससे बकाया वसूली और वाहन पहचान आसान हो सकेगी।
सबसे अहम बदलाव दंड व्यवस्था में किया गया है। अगर कोई वाहन मालिक ई-नोटिस मिलने के बाद भी भुगतान नहीं करता, तो उसे मूल टोल राशि का दोगुना भुगतान करना होगा। हालांकि, समय पर भुगतान को बढ़ावा देने के लिए 72 घंटे के भीतर भुगतान करने पर केवल मूल शुल्क ही लिया जाएगा, कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा।
नियमों में शिकायत निवारण की सुविधा भी दी गई है। यदि किसी वाहन मालिक को नोटिस पर आपत्ति है, तो वह 72 घंटे के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। संबंधित अधिकारी को 5 दिनों के भीतर इसका निपटारा करना होगा, अन्यथा बकाया शुल्क स्वतः निरस्त हो जाएगा।
इसके अलावा, यदि 15 दिनों तक बकाया राशि जमा नहीं होती और कोई शिकायत लंबित नहीं है, तो वाहन से जुड़ी सेवाओं—जैसे रजिस्ट्रेशन या अन्य प्रशासनिक कार्य—पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि इस तकनीकी सुधार से टोल प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, राजस्व संग्रह मजबूत होगा और देश में बाधा-मुक्त (फास्टैग आधारित) टोलिंग सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम न केवल नियमों के अनुपालन को सख्त करेगा, बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करेगा।
