“विनाश नहीं विकास चाहिए, परमाणु प्लांट नहीं चाहिए”: 28 हजार करोड़ के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के विरोध में गरजे रोझौही के ग्रामीण

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*रीवा में गूंजा नारा — “परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ”: रोझौही में टाटा न्यूक्लियर प्लांट का विरोध तेज!*

*सिरमौर में आर-पार की लड़ाई: 28 हजार करोड़ के पावर प्लांट के खिलाफ हजारों ग्रामीणों का हुंकार!* *28 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट और विस्थापन का खौफ: रीवा के रोझौही में क्यों भड़का परमाणु विरोधी आंदोलन? **रेडिएशन और बीमारी के भय से थर्राया रोझौही, ग्रामीणों ने नेताओं को बताया जनविरोधी* *रीवा न्यूक्लियर प्लांट विवाद: जन-विरोध के बीच अब कोर्ट जाने की तैयारी में सामाजिक कार्यकर्ता* *रोझौही का साफ संदेश: “जान देंगे, जमीन नहीं” — न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ सड़क पर उतरा जन-सैलाब** स्वच्छ हवा, साफ प्रकृति चाहिए, परमाणु नहीं: डिप्टी सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट के खिलाफ रीवा में महाआंदोलन* *बोरिंग मशीनें खदेड़ने के बाद अब सरकार को चेतावनी: रीवा में नहीं बनने देंगे न्यूक्लियर पावर प्लांट*

दिनांक: 07 अक्टूबर 2026 रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले अंतर्गत सिरमौर तहसील का रोझौही गांव इन दिनों एक बड़े जन-आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। 06 अक्टूबर 2026 को रोझौही में आयोजित विशाल जन-प्रदर्शन में हजारों की संख्या में पहुंचे स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के गगनभेदी नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। “परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ”, “विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए” और “स्वच्छ प्रकृति, साफ हवा, परमाणु नहीं इसकी दवा” जैसे तीखे नारों के साथ ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपनी जान और जमीन की कीमत पर इस संयंत्र को कतई स्थापित नहीं होने देंगे।

*क्या है 28 हजार करोड़ का पूरा प्रोजेक्ट?*

मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) राजेंद्र शुक्ला द्वारा पूर्व में सिरमौर क्षेत्र में इस वृहद परियोजना को लगाए जाने की घोषणा की गई थी। इसकी कुल लागत लगभग ₹28,000 करोड़ है जबकि प्रस्तावित भूमि का रकबा रोझौही एवं आसपास का 169 हेक्टेयर का क्षेत्र है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट टाटा पावर द्वारा स्थापित किया जाना है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस विशालकाय प्रोजेक्ट के लिए क्षेत्र के लगभग 100 से अधिक गांवों की शांति, सुरक्षा और अस्तित्व दांव पर लग जाएगा।

बोरिंग मशीनों को खदेड़ चुका है जन-आक्रोश

रोझौही और सरई कला क्षेत्र में पिछले कई महीनों से परमाणु ऊर्जा विरोधी आंदोलन सुलग रहा है। इस आंदोलन ने तब बड़ा मोड़ लिया जब पिछले दिनों एमएस फुग्रो कंपनी की बोर-होल (भूमि परीक्षण) मशीनें सर्वेक्षण के लिए गांव में दाखिल हुईं।ग्राम सभा द्वारा पूर्व में ही कलेक्टर के पत्र (क्रमांक 117) के विरोध में प्रस्ताव पारित कर असहमति जताई जा चुकी थी। इसके बावजूद जब प्रशासन और कंपनी की गाड़ियां गांव पहुंचीं, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने लामबंद होकर मशीनों को काम करने से रोक दिया और उन्हें उल्टे पांव खदेड़ दिया। इसके तुरंत बाद सरई कला ग्राम पंचायत द्वारा बुलाई गई विशेष ग्राम सभा में भी सर्वसम्मति से न्यूक्लियर प्लांट के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन

विस्थापन और रेडिएशन का मंडराता खौफ*

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल जमीन बचाने की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और अस्तित्व को बचाने की है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से भयंकर रेडिएशन का खतरा है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले रेडियोधर्मी विकिरण और उसके कचरे (न्यूक्लियर वेस्ट) से कैंसर, जल-प्रदूषण और गंभीर आनुवंशिक बीमारियों का स्थायी डर बना रहेगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन से बड़े पैमाने पर विस्थापन होना भी तय है। जिसमें 169 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित होने से हजारों परिवार बेघर और बेरोजगार हो जाएंगे। उपजाऊ कृषि भूमि छिन जाने से किसानों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।

सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता का बयान*

आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा “सरकार पूरी तरह से जनविरोधी रवैया अख्तियार कर रही है। जब क्षेत्र की जनता अपनी भूमि, पर्यावरण और जीवन की रक्षा के लिए न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहती, तो सरकार को तानाशाही रवैया छोड़कर इस प्रोजेक्ट को तत्काल रद्द करना चाहिए। यदि जन-भावनाओं की अनदेखी कर सरकार जबरन प्लांट थोपने का प्रयास करेगी, तो हमें इस मामले को लेकर न्यायालय (कोर्ट) का रुख करना पड़ेगा।”— शिवानंद द्विवेदी (सामाजिक एवं RTI कार्यकर्ता)

नेताओं को बताया जनविरोधी, कोर्ट जाने की तैयारी*

प्रदर्शन के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और नेताओं के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त की। लोगों का कहना है कि उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और स्थानीय नेताओं ने क्षेत्र के विकास के नाम पर इस विनाशकारी परियोजना का समर्थन कर जनता के साथ धोखा किया है।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते इस योजना को रोझौही से वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय रीवा का घेराव किया जाएगा और उग्र आंदोलन के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।

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