“स्वच्छ भारत मिशन पर सवाल: अधिकारी जवाबदेह नहीं,शिकायत करने से घबराती जनता”

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स्वच्छ भारत मिशन को लेकर सरकार की मंशा साफ, लेकिन नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल; लोग कहते हैं शिकायत करने पर कार्रवाई के बजाय डर का माहौल बन जाता है, इसलिए गंदगी की समस्या होने के बावजूद कई लोग सामने आने से हिचक रहे हैं।

अजमेर। स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने और नगर निकायों की जिम्मेदारी तय करने के उद्देश्य से सोमवार को के तहत नगर निगम अजमेर के नवनिर्मित सभागार में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला को राजस्थान सरकार द्वारा नियुक्त प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर ने संबोधित किया। कार्यक्रम में सहित जिले की विभिन्न नगर परिषदों और नगरपालिकाओं के आयुक्त, अधिशासी अधिकारी तथा स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत में नगर निगम अधिकारियों द्वारा ब्रांड एंबेसडर गुप्ता का स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री का स्पष्ट संकल्प है कि स्वच्छता का लाभ राज्य के अंतिम छोर तक बैठे व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी गांव, ढाणी या शहर स्वच्छता से वंचित न रहे।

गुप्ता ने कहा कि जहां स्वच्छता होती है वहां शुद्ध वातावरण बनता है और स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। स्वस्थ नागरिक ही देश और प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करती हैं, लेकिन यदि समाज स्वच्छ रहेगा तो बीमारियां कम होंगी और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च भी कम होगा।

90-ए भू उपयोग परिवर्तन पर स्पष्ट निर्देश

कार्यशाला में ब्रांड एंबेसडर ने राजस्थान नगरीय विकास नियमों के तहत होने वाले 90-ए भू उपयोग परिवर्तन को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जब तक कॉलोनाइजर द्वारा सड़क, स्ट्रीट लाइट, पानी, नाली और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास नहीं किया जाता, तब तक निर्माण स्वीकृति जारी नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कॉलोनियों में रोके गए 12.5 प्रतिशत भूखंडों का आवंटन भी तभी किया जाए जब पूरी कॉलोनी का विकास कार्य पूर्ण हो जाए। यदि इससे पहले किसी अधिकारी द्वारा आवंटन किया जाता है तो उसके लिए संबंधित अधिकारी को जिम्मेदार माना जाएगा।

बिना लाइसेंस मांस बिक्री पर सख्ती

गुप्ता ने नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना लाइसेंस मांस या मछली बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सार्वजनिक स्थानों पर खुले में मांस बिक्री को भी प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि केवल स्थानीय निकाय से लाइसेंस प्राप्त दुकानदार ही निर्धारित नियमों के तहत मांस बिक्री कर सकते हैं।

स्वच्छता अभियान में जनता की भागीदारी जरूरी

कार्यशाला में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्वच्छता के कार्यों में आम जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। खाली पड़े भूखंडों की सफाई कराकर मालिकों को नोटिस जारी किए जाएं और जुर्माना भी लगाया जाए। प्लास्टिक रोकथाम के लिए अभियान चलाया जाए तथा सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों को पकड़कर गौशालाओं में छोड़ा जाए।

इसके अलावा नगर परिषद के पार्कों में बच्चों के लिए झूले, मॉर्निंग वॉक पाथवे, फाउंटेन और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए। सार्वजनिक शौचालयों की दिन में कम से कम तीन बार सफाई और अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया।

यदि मिशन में लापरवाही हुई तो जिम्मेदारी तय होगी

कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों में लापरवाही या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सरकार की मंशा साफ है कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर भी प्रभावी रूप से दिखाई दे।

हालांकि कई स्थानों पर आमजन की यह शिकायत भी सामने आती रही है कि नगर निकायों के अधिकारियों के डर से लोग शिकायत करने से हिचकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायत करने वालों की सुरक्षा और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित हो तो स्वच्छता अभियान को और अधिक जनसमर्थन मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ भारत मिशन की सफलता तभी संभव है जब प्रशासनिक जवाबदेही तय हो, पारदर्शिता बढ़े और जनता को बिना भय के शिकायत दर्ज कराने का भरोसा मिले।

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