नई दिल्ली। राजधानी के प्रतिष्ठित सम्मेलन केंद्र में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी तकनीकी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने विश्व के विभिन्न देशों से आए राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, टेक उद्योग के प्रमुखों और नीति विशेषज्ञों का गर्मजोशी से स्वागत किया। सम्मेलन का मुख्य फोकस कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार, सुरक्षित और समावेशी उपयोग पर रहा।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एआई केवल तकनीक नहीं, बल्कि मानवता की प्रगति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत “AI for All” के सिद्धांत पर कार्य कर रहा है, जहां तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई का विकास नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए, ताकि यह असमानता या दुरुपयोग का कारण न बने।
समिट में एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क, डेटा सुरक्षा, साइबर खतरों से निपटने की रणनीति, रोजगार पर एआई के प्रभाव, डीपफेक और दुष्प्रचार जैसी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एआई के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वैश्विक स्तर पर साझा नियम और सहयोग अनिवार्य है।
भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए खुद को एआई नवाचार का उभरता केंद्र बताया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन के दौरान कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग समझौतों पर चर्चा हुई, जिनमें संयुक्त अनुसंधान, स्टार्टअप निवेश और एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
यह शिखर सम्मेलन भारत की तकनीकी कूटनीति को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित सहयोग योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो भारत एआई के क्षेत्र में वैश्विक नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
