गधा पालन पर 50 लाख तक की सरकारी सब्सिडी: ग्रामीण उद्यमिता बढ़ाने के लिए केंद्र की योजना, जानिए कब शुरू हुई और वर्तमान स्थिति क्या है
नई दिल्ली। देश में पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने के तहत पशुधन आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन देने की योजना लागू की है। इसी मिशन के अंतर्गत घोड़ा, ऊंट और गधा पालन (इक्वाइन फार्मिंग) जैसी गतिविधियों के लिए उद्यमियों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर “गधे पालने पर सरकार 50 लाख दे रही है” जैसी खबरें वायरल हुईं, जिसके बाद इस योजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, इस मिशन की शुरुआत मूल रूप से वर्ष 2014-15 में की गई थी, जबकि पशुपालन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इसे संशोधित और विस्तारित रूप में 2021-22 से लागू किया गया। यह योजना भारत सरकार के द्वारा संचालित की जा रही है। योजना का उद्देश्य पशुधन क्षेत्र को संगठित उद्योग के रूप में विकसित करना, ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना और देशी नस्लों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
इस योजना के तहत कोई भी किसान, पशुपालक, स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समिति या निजी उद्यमी पशुपालन आधारित परियोजना शुरू कर सकता है। सरकार द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार गधा पालन की एक इकाई में सामान्यतः 50 मादा गधे और 5 नर गधों का प्रजनन फार्म स्थापित किया जाता है। इस प्रकार के फार्म की कुल परियोजना लागत लगभग 80 लाख से 1 करोड़ रुपये तक आंकी जाती है, जिसमें पशु खरीद, शेड निर्माण, चारा व्यवस्था, पानी की सुविधा, पशु चिकित्सा और श्रमिकों का खर्च शामिल होता है। यदि परियोजना लागत 1 करोड़ रुपये है, तो सरकार इसके 50 प्रतिशत तक यानी अधिकतम 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी प्रदान कर सकती है।
सरकार यह सहायता सीधे नकद अनुदान के रूप में नहीं देती, बल्कि यह परियोजना आधारित सब्सिडी होती है। लाभार्थी को पहले अपनी पूंजी या बैंक ऋण के माध्यम से परियोजना शुरू करनी होती है, इसके बाद परियोजना के सत्यापन के आधार पर सरकार दो चरणों में सब्सिडी जारी करती है। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है, जिसके बाद राज्य पशुपालन विभाग और संबंधित एजेंसियां परियोजना का मूल्यांकन करती हैं।
इस योजना को लागू करने के पीछे एक बड़ा कारण भारत में गधों की घटती संख्या भी है। के आंकड़ों के अनुसार देश में गधों की आबादी में पिछले वर्षों में काफी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2012 की तुलना में 2019 की पशुगणना में गधों की संख्या घटकर लगभग 1.23 लाख रह गई थी। सरकार का मानना है कि यदि गधा पालन को व्यावसायिक रूप से बढ़ावा दिया जाए तो इससे नस्ल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत भी विकसित हो सकते हैं।
गधा पालन को लाभदायक बनाने में गधे के दूध की बढ़ती मांग भी एक महत्वपूर्ण कारण बन रही है। चिकित्सा और कॉस्मेटिक उद्योग में गधे के दूध का उपयोग होने के कारण इसकी कीमत बाजार में काफी अधिक बताई जाती है। इसके अलावा प्रजनन के माध्यम से गधों के बच्चों की बिक्री भी आय का एक स्रोत बन सकती है।
जहां तक इस योजना से लाभान्वित लोगों की बात है, सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर पशुपालन आधारित विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनसे हजारों किसानों और उद्यमियों को आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि गधा पालन से जुड़े प्रोजेक्ट अभी सीमित संख्या में हैं और धीरे-धीरे इस क्षेत्र में उद्यमियों की रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति में यह योजना देशभर में लागू है और पशुपालन विभाग समय-समय पर इसके लिए आवेदन आमंत्रित करता है। सरकार का लक्ष्य पशुपालन क्षेत्र को मजबूत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना और युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
निष्कर्ष:
केंद्र सरकार की इस योजना के तहत गधा पालन पर 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलना संभव है, लेकिन यह सीधे मुफ्त राशि नहीं है। यह परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक का अनुदान है, जिसे निर्धारित शर्तों और परियोजना स्वीकृति के बाद ही दिया जाता है।
