भ्रष्टाचारियों पर भजनलाल सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर

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अफसरशाही में हड़कंप: 103 निलंबित, 6 बर्खास्त, 11 की पेंशन बंद, 108 मामलों में अभियोजन की मंजूरी

जीरो टॉलरेंस’: सत्ता के गलियारों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक भ्रष्टाचार पर सरकार की सबसे बड़ी कार्रवाई 

जयपुर। राजस्थान की नौकरशाही में उस समय खलबली मच गई जब  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए । भ्रष्टाचार, अनियमितता और पद के दुरुपयोग के मामलों में ऐसी कार्रवाई की स्वीकृति दे डाली जिससे सरकारी महकमों में हलचल मच गई ।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक आईएएस अधिकारी सहित 103 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। वहीं 6 कार्मिकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, सेवानिवृत्ति के बाद भी कार्रवाई से बच निकलने की उम्मीद रखने वाले अधिकारियों पर भी सरकार ने शिकंजा कसते हुए 11 अधिकारियों की आजीवन पेंशन रोक दी है।

भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने 108 प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के लिए रास्ता खोल दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम उन मामलों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा, जो वर्षों से फाइलों में दबे हुए थे।

सरकार की कार्रवाई यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि पूरे सरकारी तंत्र को दिया गया एक स्पष्ट संदेश है कि जनता के पैसे और अधिकारों से खिलवाड़ अब अधिकारियों कर्मचारियों को महंगा पड़ सकता है। लंबे समय से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठती रही है और सरकार इसे अपने सुशासन एजेंडे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल कर रही है।

सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार मुक्त, जवाबदेह और पारदर्शी प्रशासन स्थापित करने के लिए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि कार्रवाई का दायरा निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा है।

हालांकि विपक्ष इस पूरे अभियान की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल भी उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि केवल आंकड़े जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि बड़े मामलों में दोषियों को अदालतों से सजा मिले और भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्तियों पर भी कठोर कार्रवाई हो।

इसके बावजूद इतना तय है कि हाल के वर्षों में राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई का दावा पहली बार सामने आया है। अब प्रदेश की जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह अभियान केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित रहेगा या भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क और प्रभावशाली चेहरों तक भी पहुंचेगा।

यदि सरकार अपने दावों के अनुरूप कार्रवाई को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने में सफल रहती है तो यह राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकती है।

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