आनासागर में मर रही मछलियों की चिंता… या फिर राजनीति?अभी भी नहीं जागे तो…!

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24 अक्टूबर, 2022 को की गई भविष्यवाणी अब सत्य होने का समय आ चुका है। समय आने पर उस ऐतिहासिक भविष्यवाणी का वीडियो भी सामने लाया जाएगा ।

प्रकृति के सामने कोई नहीं टिकता। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या अजमेर समय रहतेलोग जागेंगे या फिर प्रकृति अपना फैसला स्वयं सुनाएगी?

आज आनासागर में मर रही मछलियों पर चिंता जताई जा रही है। लेकिन यह चिंता है या राजनीति? यह सवाल अजमेर की जनता पूछ रही है।

क्या आपका जनप्रतिनिधि आपके परिवार बच्चे की मौत पर दुःखी होता है ?,महिलाओं का सम्मान करने वाले आज महिलाओं के आँसुओं के मोती बनाकर माला पहन रहे ? कौन पूछेगा सवाल ?

उनके लिए मछली सिर्फ खाने की प्लेट का व्यंजन तो नहीं? यह जनता को आगे समझना होगा । फिर मछलियों की मौत पर अचानक इतनी संवेदनशीलता क्यों?

अब अजमेर की स्थानीय जनता को यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि कुछ लोगों के लिए आनासागर की मिट्टी सोना उगल रही है और मछलियाँ प्लेटों में सजाई जा रही हैं। ऐसे में झील बचे या न बचे, इससे किसे फर्क पड़ता है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आनासागर की परिधि तय किए जाने के बाद भी वह और छोटा कैसे होता गया? कौन जिम्मेदारी हैंजो आज भी निर्माणों को बढ़ावा दे रहा ,क्यों चुप हैं जनप्रतिनिधि? आखिर वह कौन-सी ताकत है जो कागज़ पर झील बचाती है और धरातल पर उसे सिकोड़ देती है?

जागो और पूछो अपने नेता से कौन रोकेगा इसे ?

दूसरा सवाल—सीवरेज लाइन को भौगोलिक स्थिति के विपरीत दिशा में, वह भी आनासागर की भूमि में बनाने के आदेश किसने दिए? किसकी अनुमति से? किसके हित में? और किसकी जवाबदेही तय होगी?

विडंबना देखिए, सीवरेज प्लांट के पास बना स्कूल और मंदिर आज भी उसी गंदगी और दुर्गंध को झेल रहे हैं। क्या यही विकास है? क्या यही स्मार्ट सोच है?

जी मॉल के पीछे का क्षेत्र आज भी सबकी आँखों के सामने है। जहाँ कुछ देर खड़ा रहना मुश्किल हो, वहाँ लोग आज भी रहने को मजबूर हैं। इससे बड़ी इंसानियत की विडंबना और क्या होगी? लेकिन शायद यह दृश्य किसी को दिखाई नहीं देता। और यह सब उस क्षेत्र में हो रहा है, जिसे अपने आप को विकासशील राजनीति का गढ़ कहने में गर्व होता है।

यदि वास्तव में आनासागर को बचाना है तो केवल मछलियों पर आँसू बहाने से कुछ नहीं होगा। झील बचानी है तो उसके आसपास रहने वाले लोगों को विश्वास में लेना होगा, उन्हें सम्मानपूर्वक व्यवस्थित रहने का स्थान देना होगा और धरातल पर समाधान करना होगा।

अन्यथा यह आंदोलन भी कुछ दिनों तक सुर्खियाँ बटोरेगा, फोटो खिंचेंगे, बयान आएँगे, ज्ञापन दिए जाएँगे… और फिर सब कुछ पहले की तरह शांत हो जाएगा।

समाधान कागज़ के टुकड़ों पर नहीं, धरातल पर होगा।

अजमेर का स्थानीय युवा जागेगा, तभी आनासागर बचेगा।

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