
परिजनों का दावा—डॉक्टरों ने मृत घोषित कर शव सौंपा, पीएम की तैयारी से पहले मरीज में दिखी सांस; सीधी से इलाज कराने आए थे परिजन
रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। इस बार परिजनों ने अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर ऐसा सनसनीखेज आरोप लगाया है, जिसने पूरे मामले को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों का दावा है कि अस्पताल में उपचार के लिए लाए गए एक मरीज को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया और उसे मुर्दाघर भेज दिया गया, लेकिन पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मरीज के जीवित होने की बात सामने आ गई।बताया जा रहा है कि मरीज को उसके परिजन सीधी से इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल, रीवा लेकर पहुंचे थे। 4 सितंबर की रात अस्पताल में ड्यूटी पर डॉ. अनुराग चौरसिया के होने की जानकारी सामने आ रही है। परिजनों के मुताबिक मरीज की जांच पीजी चिकित्सक द्वारा भी की गई थी और इसके बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया।मामला उस समय बेहद गंभीर हो गया, जब मृत घोषित किए जा चुके मरीज को मुर्दाघर पहुंचाने के बाद उसमें जीवन के संकेत दिखाई देने का दावा किया गया। परिजनों के अनुसार पोस्टमार्टम की तैयारी से पहले मरीज के जीवित होने की जानकारी हुई, जिसके बाद उसे तत्काल वापस लाकर अस्पताल के मेडिसिन गंभीर रोगी वार्ड में भर्ती किया गया।इस घटना ने संजय गांधी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चिकित्सकीय परीक्षण के बाद किसी जीवित मरीज को मृत कैसे घोषित किया गया? क्या मरीज की जांच में गंभीर चूक हुई या फिर मृत्यु घोषित करने की प्रक्रिया में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया?फिलहाल पूरे मामले में परिजनों के आरोप सामने आए हैं। अस्पताल प्रबंधन अथवा संबंधित चिकित्सकों की ओर से इस आरोप पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। मामले की वास्तविक तस्वीर जांच और अस्पताल प्रशासन के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी।रीवा के संजय गांधी अस्पताल को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच यह नया मामला सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बहस और तेज हो गई है। अब निगाह इस बात पर है कि अस्पताल प्रबंधन इस गंभीर आरोप पर क्या जवाब देता है और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
