अजमेर। अजमेर में बुधवार को हुई महज आधे घंटे की बारिश ने एक बार फिर शहर के विकास मॉडल और नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। वैशाली नगर सेक्टर-3 स्थित आवासन मंडल के मकानों के सामने पानी भर गया तो शिव विहार में सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के सामने भी सड़कें जलमग्न नजर आईं। हालात ऐसे रहे कि आमजन को यह समझना मुश्किल हो गया कि शहर में सड़कें बनी हैं या बरसात के दिनों के लिए छोटे-छोटे तालाब तैयार किए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल उस क्षेत्र को लेकर है, जहां हाल ही में एक बड़े आयोजन के जरिए सागर विहार पंप हाउस को दो बड़े पंप देने की घोषणा का ढिंढोरा पीटा गया था। बाद में सामने आया कि नगर निगम ने तीन पंप खरीदे हैं और वे फिलहाल पटेल स्टेडियम में रखे होने की जानकारी है। अब सवाल सीधा है—जब पानी की निकासी के लिए पंप खरीदे गए हैं तो जलभराव के समय वे पंप हाउस तक क्यों नहीं पहुंचे? आखिर पंप जनता का पानी निकालने के लिए खरीदे गए हैं या फिर सरकारी गोदाम और स्टेडियम की शोभा बढ़ाने के लिए?
इस पूरे मामले में एक और सवाल क्षेत्र के नामकरण को लेकर भी उठ रहा है। जिस स्थान को आयोजन में सागर विहार क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया, वहां यदि वास्तव में सागर विहार पंप हाउस है तो उद्घाटन समारोह उसी पंप हाउस पर क्यों नहीं हुआ? क्या सरकारी योजनाओं और उद्घाटनों में भी अब स्थान का चयन सुविधा और प्रचार के हिसाब से होने लगा है? हालांकि यह आयोजकों और जनप्रतिनिधियों का विषय हो सकता है, लेकिन जनता का सवाल यह है कि उसे पंप कब मिलेगा और पानी कब निकलेगा?
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इसी बीच पूर्व पार्षद एवं अजमेर भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश सोनी जलभराव की वास्तविक स्थिति देखने मौके पर पहुंचे। खबर वन न्यूज ने उन्हें मौके की वास्तविक तस्वीर दिखाई और बताया कि समस्या केवल बारिश की नहीं है, बल्कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जल निकासी व्यवस्था और कथित अनियोजित निर्माण से जुड़ी गंभीर समस्या है।
खबर वन न्यूज द्वारा पूर्व में उठाए गए नगर निगम के नक्शा प्रकरण के बावजूद यदि संबंधित क्षेत्र में निर्माण कार्य जारी है तो यह सवाल बेहद गंभीर है कि आखिर किसके संरक्षण में यह निर्माण हो रहा है? क्या नगर निगम के नियम-कायदे केवल आम आदमी के लिए हैं और प्रभावशाली निर्माणकर्ताओं के लिए अलग कानून चलता है?

जानकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार जलभराव के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन क्षेत्र में लगातार हो रहे बहुमंजिला निर्माण, डूब क्षेत्र में निर्माण की शिकायतें और पर्याप्त नाले का अभाव इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। जिस क्षेत्र में आबादी लगातार बढ़ रही है, वहां यदि पानी की निकासी आज भी सीमित नालियों के भरोसे है तो भारी बारिश में जलभराव होना कोई आश्चर्य नहीं।
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अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या वह अगली बारिश का इंतजार करेगा या इस बार कार्रवाई करेगा?
जिला प्रशासन, अजमेर विकास प्राधिकरण और नगर निगम को तत्काल संयुक्त जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित निर्माणों के नक्शे किस आधार पर स्वीकृत हुए, क्या निर्माण डूब क्षेत्र अथवा प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रहा है, जल निकासी की स्वीकृत योजना क्या है और निर्माण नियमों का पालन किया गया है या नहीं।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित निर्माण को तत्काल सील कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही जिन अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों की लापरवाही अथवा मिलीभगत से नियमविरुद्ध निर्माण को अनुमति मिली, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
क्योंकि जनता को भाषण, उद्घाटन और बड़े-बड़े दावों से ज्यादा जरूरत जलभराव से मुक्ति, सुचारु जल निकासी और सुरक्षित शहर की है।
बारिश सिर्फ आधे घंटे हुई थी, लेकिन उसने प्रशासन से ऐसे सवाल पूछ दिए हैं जिनका जवाब शायद वर्षों से लंबित है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार लोग जवाब देंगे या फिर अगली बारिश में फिर वही सड़कें तालाब बनेंगी, वही जनता परेशान होगी और वही पंप किसी स्टेडियम में खड़े होकर सरकारी व्यवस्था की तस्वीर देखते रहेंगे।
