सोहागी पहाड़ के ‘डेथ पॉइंट’ पर शिवानंद द्विवेदी की आवाज का असर, NH-30 चौड़ीकरण का काम तेज

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हादसों के लिए बदनाम करीब 6 किलोमीटर के घाट मार्ग पर निर्माण प्रगति पर; वर्षों से सड़क सुरक्षा और जवाबदेही का मुद्दा उठाते रहे हैं सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता संत शिवानंद द्विवेदी

रीवा/त्यौंथर। सोहागी पहाड़ के एनएच-30 घाट मार्ग को लेकर लंबे समय से उठती आ रही सड़क सुरक्षा की आवाज अब जमीन पर चल रहे निर्माण कार्य के बीच एक नए पड़ाव पर दिखाई दे रही है। करीब 6 किलोमीटर के संवेदनशील घाट हिस्से में सड़क के चौड़ीकरण और सुधार का काम प्रगति पर है। इस पूरे मुद्दे को लगातार जनसुरक्षा से जोड़कर उठाने वालों में सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता संत शिवानंद द्विवेदी प्रमुख रूप से सामने रहे हैं।सोहागी पहाड़ का यह हिस्सा लंबे समय से वाहन चालकों और यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। तीखे मोड़, ढलान, सीमित सड़क चौड़ाई और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यहां सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हादसों की घटनाओं ने इस मार्ग की संवेदनशीलता को और गंभीर बनाया है।

शिवानंद द्विवेदी ने सड़क को सिर्फ निर्माण नहीं, जनसुरक्षा का मुद्दा बनाया

सोहागी पहाड़ NH-30 पर चौड़ीकरण का चल रहा काम और सड़क सुरक्षा को लेकर आवाज उठाते सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता संत शिवानंद द्विवेदी

संत शिवानंद द्विवेदी लंबे समय से सोहागी पहाड़ मार्ग पर सड़क सुरक्षा, दुर्घटनाओं की रोकथाम और निर्माण कार्यों की जवाबदेही का सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना रहा है कि किसी भी सड़क परियोजना का वास्तविक मूल्यांकन केवल सड़क बनने से नहीं, बल्कि क्या उस सड़क पर लोगों की जान सुरक्षित हुई या नहीं, इससे होना चाहिए।इसी दृष्टिकोण से सोहागी पहाड़ के संवेदनशील हिस्से को लेकर उन्होंने समय-समय पर प्रशासन और संबंधित एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया है।

अब मशीनें मौके पर, निगाह गुणवत्ता और सुरक्षा पर

सोहागी पहाड़ पर पूर्व में हुए गंभीर सड़क हादसों ने इस मार्ग को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद क्या दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी, यह आने वाला समय बताएगा।फिलहाल निर्माण स्थल पर चल रहा काम उन लोगों के लिए उम्मीद का विषय है, जो वर्षों से इस मार्ग को सुरक्षित बनाने की मांग उठाते रहे हैं।संत शिवानंद द्विवेदी के लिए यह केवल सड़क चौड़ीकरण की परियोजना नहीं, बल्कि उन परिवारों की सुरक्षा का सवाल है जिन्होंने सड़क हादसों में अपनों को खोया है।अब देखने वाली बात यह होगी कि सोहागी पहाड़ की सड़क चौड़ी होने के साथ क्या उसकी दुर्घटना वाली पहचान भी पीछे छूटती है या नहीं।

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