गोपालपुर की वनभूमि पर चली आरी, 151 हेक्टेयर जंगल में खनन की तैयारी; करीब 5,500 पेड़ों की कटाई का दावा

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शहडोल के बुढ़ार क्षेत्र में वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के बीच सामने आया बड़ा आंकड़ा, 114 हेक्टेयर में प्रस्तावित है ओपन कास्ट कोल माइंस

शहडोल/बुढ़ार। मध्यप्रदेश में हरियाली बढ़ाने और पौधरोपण को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन शहडोल जिले के बुढ़ार क्षेत्र से सामने आई तस्वीर वनभूमि और खनन के बीच खड़े एक बड़े सवाल की ओर इशारा कर रही है। गोपालपुर बीट की करीब 151 हेक्टेयर वनभूमि को बिरला कॉर्पोरेशन लिमिटेड की विक्रम कोल माइंस के लिए हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।बताया जा रहा है कि प्रस्तावित वनभूमि में लगभग 114 हेक्टेयर हिस्सा ओपन कास्ट माइनिंग के लिए निर्धारित है, जबकि शेष भूमि पर अंडरग्राउंड माइनिंग प्रस्तावित है। वन क्षेत्र में साल, सागौन, महुआ, आम और यूकेलिप्टस समेत अलग-अलग प्रजातियों के करीब 6,600 पेड़ दर्ज बताए जा रहे हैं।

एक साल में हजारों पेड़ों पर चली आरी

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक पिछले करीब एक वर्ष के दौरान इस वन क्षेत्र में लगभग 5,500 पेड़ काटे जा चुके हैं। अब करीब एक हजार पेड़ों के शेष होने की बात कही जा रही है। यदि यह आंकड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्ट होता है, तो यह कटाई वनभूमि के बड़े हिस्से में हो चुकी कार्रवाई का संकेत देती है।पेड़ों की कटाई के बाद करीब 45 हेक्टेयर वनभूमि माइंस कंपनी को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है। शेष हिस्से को भी हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।

पौधरोपण के दावों के बीच जंगल की जमीन का दूसरा चेहरा

एक ओर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की बात लगातार सामने आती है, वहीं दूसरी ओर खनिज संसाधनों के दोहन के लिए वनभूमि के इस्तेमाल का सवाल खड़ा होता है। गोपालपुर का मामला इसी विरोधाभास को सामने ला रहा है।कोयला खनन से जुड़े विकास और औद्योगिक गतिविधियों के बीच वन क्षेत्र में मौजूद पुराने पेड़ों की कटाई पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी चर्चा का विषय बन रही है। हालांकि कटाई और वनभूमि हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया संबंधित स्वीकृतियों एवं शासकीय आदेशों के तहत हो रही है या नहीं, इसका अंतिम आकलन संबंधित अभिलेखों और सक्षम प्राधिकरणों की प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा।

वन विभाग ने क्या कहा?

दक्षिण वन मंडल शहडोल की DFO श्रद्धा पन्द्रे के अनुसार शासन के निर्देश के तहत गोपालपुर की करीब 151 हेक्टेयर वनभूमि निजी कोल माइंस के लिए दी जानी है। इसमें 114 हेक्टेयर क्षेत्र ओपन कास्ट माइनिंग तथा शेष क्षेत्र अंडरग्राउंड माइनिंग के लिए प्रस्तावित है।DFO के मुताबिक वनभूमि में मौजूद पेड़ों की कटाई की जा रही है और शासन के निर्देशानुसार जमीन को जल्द माइंस के लिए हैंडओवर किया जाना है।

अब असली सवाल जंगल से आगे का है

गोपालपुर में मामला सिर्फ पेड़ों की संख्या तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि कितनी वनभूमि वास्तव में खनन के लिए हस्तांतरित होगी, कितने पेड़ काटे जाने की अनुमति है, कितनी कटाई पूरी हो चुकी है और उसके बदले प्रतिपूरक वनीकरण की व्यवस्था कहां और किस स्तर पर की जाएगी।वनभूमि के हस्तांतरण और पेड़ों की कटाई से जुड़े इन सवालों के जवाब आने वाले समय में इस पूरे मामले की तस्वीर को और स्पष्ट कर सकते हैं।

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